सीएमओ ऑफिस में सांठगांठ से डॉक्टर की डिग्री पर पंजीकरण करवा कर हो रहा बड़ा घोटाला
कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।अम्बेडकरनगर जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। अपंजीकृत अस्पतालों के विरुद्ध समय-समय पर चलने वाले अभियानों के बावजूद अब पंजीकृत अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से ऐसे अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जहां डॉक्टर की डिग्री के नाम पर रजिस्ट्रेशन तो करा लिया जाता है, लेकिन संबंधित चिकित्सक स्वयं अस्पताल में उपस्थित नहीं रहते।
जनपद के विभिन्न बाजारों और कस्बों में खुले कई निजी अस्पतालों के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां इलाज के नाम पर मनमानी वसूली की जा रही है। जिन बीमारियों का सामान्य उपचार कुछ सौ रुपये में संभव है, वही उपचार हजारों रुपये में किया जा रहा है। आम जनता, विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, महंगे इलाज के बोझ तले दबता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल पंजीकरण की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका है। आरोप है कि किसी योग्य चिकित्सक की डिग्री का उपयोग कर अस्पताल का पंजीकरण करा लिया जाता है, लेकिन वास्तविक संचालन अप्रशिक्षित अथवा अयोग्य व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। इससे न केवल मरीजों की जेब पर डाका पड़ रहा है, बल्कि उनकी जान भी जोखिम में पड़ सकती है। ऑपरेशन और गंभीर उपचार जैसे संवेदनशील कार्य यदि प्रशिक्षित चिकित्सक की अनुपस्थिति में किए जाएं तो परिणाम घातक हो सकते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब भी कोई शिकायत सामने आती है, तो अस्पताल के पंजीकृत होने का हवाला देकर मामले को दबा दिया जाता है। सवाल यह है कि क्या केवल रजिस्ट्रेशन होना ही पर्याप्त है, या अस्पताल में योग्य चिकित्सक की नियमित उपस्थिति और मानकों का पालन भी अनिवार्य है? यदि पंजीकरण के बाद भी मानकों का उल्लंघन हो रहा है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है?
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठ रही हैं। आरोप है कि विभागीय स्तर पर सांठगांठ के कारण इन अनियमितताओं पर पर्दा डाला जा रहा है। केवल झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, जबकि पंजीकृत अस्पतालों में चल रही संभावित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती।
अगर देखा जाए तो जनपद के राजेसुलतानपुर, जहांगीरगंज, रामनगर, बसखारी, रफीगंज, न्यौरी, टांडा, इल्तिफ़ातगंज, कटहरी, भीटी, जलालपुर , मालीपुर, कटका, नेवादा, मुंडेहरा, बंदीपुर, आदि तमाम बाजारों में आपको पंजीकृत क्लिनिक और अस्पताल तो मिलेंगे लेकिन संबंधित चिकित्सक नहीं मिलेंगे। वहां पर इलाज आपको अस्पताल संचालक अथवा कोई अप्रशिक्षित चिकित्सक करते नजर आयेंगे ।
जनता के मन में यह सवाल गूंज रहा है कि यदि पंजीकृत अस्पतालों में भी अप्रशिक्षित लोगों द्वारा इलाज किया जा रहा है तो आम नागरिक किस पर भरोसा करे? ईश्वर के बाद चिकित्सक को जीवनदाता माना जाता है, लेकिन यदि चिकित्सा सेवा ही व्यापार का रूप लेकर मुनाफाखोरी का माध्यम बन जाए, तो यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
अब आवश्यकता है कि जनपद स्तर पर एक निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, सभी पंजीकृत अस्पतालों का भौतिक सत्यापन हो, संबंधित चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा उपचार दरों की पारदर्शी सूची सार्वजनिक की जाए। यदि कहीं भी अनियमितता पाई जाती है तो कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो, ताकि जनता का विश्वास स्वास्थ्य व्यवस्था में पुनः स्थापित हो सके।