कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।उर्दू के महान शायर मिर्जा ग़ालिब की 157वीं पुण्यतिथि पर साहित्यिक संस्था बज़्मे सुखन बसखारी के तत्वावधान में “एक शाम मिर्जा ग़ालिब के नाम”साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन रविवार की शाम शालीमार लॉन,बसखारी में हुआ।कुमैल सिद्दीकी के संरक्षण, शशि सिंह की अध्यक्षता तथा हकीम इरफान आजमी के संचालन में हुए मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि मिर्जा ग़ालिब की शायरी में ख्यालात की गहराई का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।उनकी शख्सियत उर्दू अदब की दुनिया में एक चमकता सितारा है।कुमैल सिद्दीकी ने कहा कि ग़ालिब की शायरी समय और सीमाओं से परे है।उनकी रचनाएं हर दौर में प्रासंगिक रही है।शशि सिंह ने कहा कि साहित्य समाज को सोचने की दिशा देता है।सुम्मुन खातून टांडवी ने कहा कि ग़ालिब की ग़ज़लों में जुबान की नजाकत और इंसानी जज़्बात की एक मजबूत आवाज़ है।डॉ.मायादेवी ने कहा कि मिर्जा गालिब ने अपनी शायरी में जमाने के उतार-चढ़ाव को भी जगह दी है।हकीम इरफान आजमी,नसीम सिद्दीकी,कुमैल डोंडवी, सुम्मुन खातून ने ग़ालिब की मशहूर ग़ज़लों और अपनी रचनाओं का पाठ कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।