कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।जिलाधिकारी श्री अनुपम शुक्ला के निर्देश पर पीडी डीआरडीए अनिल कुमार सिंह द्वारा कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद में अंडा उत्पादन और उपलब्धता की समीक्षा बैठक दिनांक 24 फरवरी 2026 को देर सायं में की गई।
पीडी डीआरडीए ने समीक्षा में पाया की उत्तर प्रदेश में लगभग डेढ़ करोड़ से 1.7 करोड़ का उत्पादन प्रतिदिन किया जा रहा है, जबकि आवश्यकता 3.5 करोड़ से साढ़े 5 करोड़ की है।
जनपद अम्बेडकर नगर की कुल जनसंख्या 24 लाख है 25 प्रतिशत के हिसाब से अंडा खपत 6 लाख लगभग है। 180 अंडा प्रति कैपिटा के हिसाब से कुल अंडा की आवश्यकता 10 करोड़ 80 लाख प्रति वर्ष है। वर्तमान में जनपद का अंडा उत्पादन प्रतिमाह लगभग तीस लाख अंडा की है। समीक्षा में पाया गया कि 60 लाख प्रति माह अंडे की कमी है। जनपद में वर्तमान में पांच पैरेंट फार्म व लगभग चार सौ से पांच सौ ब्रायलर फार्म हैं। जनपद में 07 लाख 20 हजार कुल चूजा उत्पादन हो रहा है, जबकि 15 लाख चूजे की आवश्यकता है।
पीडी डीआरडीए ने बैठक में सम्बंधित अधिकारियों को निर्देशत किया कि जनपद में कुक्कुट विकास नीति 2013 के तहत संचालित योजनाओं के प्रति किसानों व बेरोजगारों को जागरूक करें। वर्तमान सरकार द्वारा सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा। उन्होंने कहा की कामर्शियल लेयर व ब्रायलर पैरेंट फार्म की स्थापना हेतु जो मार्च 2013 से 2022 के बीच लाभान्वित न हुआ हो उसे प्रेरित किया जाय।
इस अवसर पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया है कि उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति-2022 के अंतर्गत जनपद में कुक्कुट पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न प्रोत्साहनात्मक सुविधाएं एवं अनुदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में अंडा एवं मांस उत्पादन को बढ़ाना, प्रोटीन युक्त आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करना, कुक्कुट मांस की सतत आपूर्ति बनाए रखना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। साथ ही, कुक्कुट पालन के क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देकर किसानों एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है।
नीति के अंतर्गत भूमि की आवश्यकता के अनुसार 10 हजार क्षमता की एक व्यावसायिक लेयर इकाई एक एकड़ में, 30 हजार क्षमता की 2.5 एकड़ में ब्रायलर इकाई, 60 हजार क्षमता की 4 एकड़ में लेयर इकाई तथा 10 हजार क्षमता की 4 एकड़ में ब्रायलर पैरेंट इकाई स्थापित की जा सकती है। लाभार्थियों को बैंक ऋण पर 7 प्रतिशत ब्याज की प्रतिपूर्ति, भूमि क्रय या लीज पर स्टाम्प शुल्क में शत-प्रतिशत छूट, विद्युत संयोजन पर पांच वर्ष तक सभी प्रकार के सरचार्ज में शत-प्रतिशत छूट सहित विभिन्न रियायतें प्रदान की जा रही हैं।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि पात्र पशुपालकों के पास न्यूनतम एक एकड़ भूमि होना आवश्यक है तथा मार्जिन मनी के रूप में 30 प्रतिशत धनराशि की व्यवस्था करनी होगी। इच्छुक अभ्यर्थी विभागीय कार्यालय से संपर्क कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
परियोजना निदेशक डीआरडीए ने जनपद के पशुपालकों एवं युवा उद्यमियों से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएं तथा जनपद में कुक्कुट उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहभागी बनें।
बैठक के दौरान अंडा उत्पादन के उद्यमी और संबंधित विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर उद्यमियों से उनकी अपेक्षाओं एवं सुझावों को भी सुना गया।