आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर।समाज में बढ़ती दहेज प्रथा के बीच एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। लड़के के पिता सूबेदार यादव ने दहेज में मिली राशि और सामान को वापस कर दिया तथा बिना दहेज शादी करने का निर्णय लिया। 25 फरवरी को यह विवाह सादगी, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ।
बताया जा रहा है कि प्रारंभिक बातचीत के दौरान दहेज की चर्चा हुई थी, लेकिन बाद में सूबेदार यादव ने स्पष्ट कर दिया कि उन्हें किसी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं है। उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए कहा कि विवाह एक पवित्र संबंध है, इसे लेन-देन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
निर्धारित तिथि 25 फरवरी को दोनों परिवारों की उपस्थिति में धूमधाम से शादी सम्पन्न हुई। खास बात यह रही कि लड़के के पिता ने प्रतीकात्मक रूप से केवल एक रुपया स्वीकार किया, जिसे उन्होंने शुभ संकेत और परंपरा के सम्मान के रूप में बताया।
इस अनूठी शादी की चर्चा दोनों जनपदों में हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की पहल समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और दहेज प्रथा जैसी कुरीति को समाप्त करने की दिशा में सकारात्मक कदम है। लोगों ने सूबेदार यादव और उनके परिवार को इस सराहनीय निर्णय के लिए बधाई दी है।
सामाजिक जानकारों का मानना है कि यदि लड़के पक्ष के लोग इसी प्रकार दहेज का त्याग करें, तो बेटियों के माता-पिता को आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव से राहत मिल सकती है। दहेज मुक्त विवाह न केवल समानता और सम्मान का संदेश देता है, बल्कि समाज में आपसी विश्वास और सद्भाव को भी मजबूत करता है।
यह विवाह यह साबित करता है कि बदलाव की शुरुआत एक परिवार से भी हो सकती है। जरूरत है तो केवल सकारात्मक सोच और साहसिक निर्णय की, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण किया जा सके।