देवल संवाददाता, मऊ। जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र की अध्यक्षता में जिला वृक्षारोपण, पर्यावरण समिति आर्द्र भूमि समिति एवं जिला गंगा समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। बैठक के दौरान वन अधिकारी पीके पांडे ने बताया कि जनपद को वर्ष 2026-27 के लिए शासन स्तर से 30 लाख 51 हजार 481 पौधरोपण का लक्ष्य मिला है। उन्होंने बताया कि जनपद स्तर पर वन विभाग को 15 लाख, कृषि विभाग को 181000, उद्यान विभाग को 113000, ग्राम्य विकास विभाग को 808821, पंचायती राज विभाग 93000 एवं राजस्व विभाग को 76000 सहित अन्य विभागों को भी लक्ष्य निर्धारित किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए भूमि का चिन्हीकरण एवं गड्ढों की खुदाई का कार्य संबंधित विभाग के अधिकारी सुनिश्चित कर लें। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी भूमि का चिन्हीकरण कर रिपोर्ट उपलब्ध करा दें, जिसको विभागीय पोर्टल पर फीड किया जा सके।वन अधिकारी ने यह भी बताया कि जनपद में वर्ष 2020 से वर्ष 2023 तक किए गए पौधरोपण का सत्यापन शासन स्तर से गठित टीम द्वारा किया जाएगा।जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्ष 2024-25 में लगाए गए पौधों का सत्यापन रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध करा दें।जिलाधिकारी ने जिला गंगा समिति की समीक्षा करते हुए बताया कि जनपद में विभिन्न धार्मिक अवसरों पर नदियों में मूर्तियों के विसर्जन के कारण जल गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव देखा जा रहा है। मूर्तियों के निर्माण में प्रयुक्त प्लास्टर ऑफ पेरिस, रासायनिक रंग,वार्निश एवं अन्य अविघटनीय पदार्थ नदी के जल में घुलकर प्रदूषण बढ़ाते हैं, जिससे बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) तथा केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (COD) के स्तर में वृद्धि दर्ज की जाती है।बीओडी और सीओडी का बढ़ना जल में घुलित ऑक्सीजन की कमी को दर्शाता है,जो जलीय जीव-जंतुओं, मछलियों तथा समग्र नदी पारिस्थितिकी के लिए हानिकारक है। इसके अतिरिक्त, भारी धातुओं एवं रासायनिक अवशेषों के कारण जल मानव उपयोग के लिए भी असुरक्षित हो सकता है।नदियों में मूर्ति विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को रोकने हेतु जिलाधिकारी द्वारा अभी से आवश्यक प्रयास करने के निर्देश दिए, ताकि लोग अपने त्योहारों के उपरांत मूर्तियों को तमसा,घाघरा अथवा अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जित करने के बजाय निर्धारित स्थलों/कृत्रिम कुंडों में ही विसर्जन करें, जिससे जल प्रदूषण को रोका जा सके।नदियों में मूर्ति विसर्जन से जलीय जीवन प्रभावित होता है। इसके प्रति जन-जागरूकता बढ़ाकर हम सभी अपनी नदियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रख सकते हैं।बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी विवेक कुमार श्रीवास्तव,जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता,डीसी मनरेगा राजीव कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी कुमार अमरेंद्र सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।