देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। जिला मुख्यालय के प्रमुख शहर सोनभद्र नगर की सड़कों पर इन दिनों ट्रैफिक से ज्यादा 'सांडराज' का कब्जा दिख रहा है। आलम यह है कि नगर के मुख्य मार्ग सहित चौराहों पर झुंड के झुंड आवारा पशु बैठे नजर आते हैं, मानो सड़कें उनके लिए आरक्षित हों। नगर पालिका प्रशासन की खुली लापरवाही ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि हर गुजरता वाहन एक संभावित हादसे की तरफ बढ़ रहा है।
सुबह स्कूल जाते बच्चे, दफ्तर भागते कर्मचारी और मरीज लेकर जा रही एंबुलेंस सभी को सड़कों के बीच जमे पशुओं से जूझना पड़ता है। दोपहिया सवार गिरकर चोटिल हो जा रहे हैं, बावजूद इसके आदर्श नगर पालिका प्रशासन के जिम्मेदारों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। बतादें कि नगर पालिका हर साल आवारा पशु पकड़ने और गौशाला संचालन के नाम पर लाखों रुपए खर्च दिखाती है, मगर हकीकत सड़कों पर घूम रही है। नगर पालिका के जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते नगर में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए नियमित धर-पकड़ अभियान भी नहीं चलाया जा रहा है। सब्जी मंडी और मुख्य बाजार में पशु कूड़े के ढेर में मुंह मारते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन
किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। अगर किसी दिन स्कूल वैन या एंबुलेंस सांड से टकरा गई तो जिम्मेदारी कौन लेगा?। नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल व्यापक अभियान चलाकर सड़कों को आवारा पशुओं से मुक्त नहीं कराया गया, तो वे नगर पालिका कार्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
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