कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।बहुचर्चित मंशाराम यादव हत्याकांड में जिला अदालत ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व ब्लॉक प्रमुख व कथित माफिया अजय सिंह सिपाही सहित तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एडीजे प्रथम की अदालत ने दोष सिद्ध होने के बाद सजा का ऐलान किया। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद तीनों दोषियों को कड़ी पुलिस सुरक्षा में न्यायालय से जेल भेज दिया गया।
23 मार्च 2016 को हुई थी सनसनीखेज वारदात
यह मामला 23 मार्च 2016 का है। अभियोजन के अनुसार, मंशाराम यादव की हत्या अजय सिंह सिपाही के घर पर की गई थी। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की नीयत से शव को ठिकाने लगा दिया गया। अगले दिन मृतक का शव पड़ोसी जनपद सुल्तानपुर में बरामद हुआ, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।
घटना के बाद मृतक की बुआ ने थाना महरुआ में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने गंभीरता से विवेचना करते हुए साक्ष्य संकलित किए और अजय सिंह सिपाही, अजय यादव तथा मुलायम यादव के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
गवाहों और साक्ष्यों से सिद्ध हुआ अपराध
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और तकनीकी प्रमाणों के आधार पर आरोपों को मजबूती से रखा। बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए न्यायालय ने तीनों आरोपियों को हत्या का दोषी पाया।
एडीजे प्रथम ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य पर्याप्त और विश्वसनीय हैं, जो यह साबित करते हैं कि हत्या सुनियोजित थी और साक्ष्य मिटाने का प्रयास भी किया गया।
अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
फैसले को देखते हुए न्यायालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखी गई थी। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषियों को पुलिस अभिरक्षा में लेकर सीधे जेल भेज दिया गया।
पीड़ित पक्ष ने जताया संतोष
करीब दस वर्ष तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए फैसले से पीड़ित परिवार ने संतोष जताया है। उनका कहना है कि न्यायालय के निर्णय से उन्हें न्याय मिला है। फिलहाल पूरे जनपद में इस फैसले की चर्चा है। आजीवन कारावास की सजा के साथ ही मंशाराम यादव हत्याकांड के इस बहुचर्चित मामले में अदालत ने सख्त संदेश दिया है कि कानून के शिकंजे से कोई भी बच नहीं सकता।