आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर, 22 फरवरी 2026। जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है—जीवन की आधारशिला और मानव सभ्यता की जीवनरेखा। जब जल स्वच्छ और संरक्षित रहता है, तब पर्यावरण के साथ-साथ समाज का सामूहिक स्वास्थ्य और संतुलन भी सुदृढ़ होता है। इसी भावना को साकार करते हुए संत निरंकारी मिशन द्वारा ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान के चौथे चरण का भव्य आयोजन किया गया, जिसने सेवा, समर्पण और जागरूकता का सशक्त संदेश दिया।
स्थानीय मीडिया सहायक उदय नारायण जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के मार्गदर्शन में भारत के 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 930 शहरों में 1600 से अधिक स्थानों पर आयोजित हुआ। इस व्यापक अभियान में लगभग 12 लाख स्वयंसेवकों ने भाग लेकर प्राकृतिक जल स्रोतों—नदियों, तालाबों, झीलों एवं घाटों—की स्वच्छता का संकल्प लिया।
जौनपुर में 43 शाखाओं का संयुक्त प्रयास
जनपद जौनपुर में ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के अंतर्गत 43 शाखाओं ने मिलकर 25 स्थानों पर नदी, घाट एवं तालाबों की सफाई की। शहर में गोमती नदी के तट पर शाही पुल के पास हनुमान घाट एवं गोपी घाट पर संयोजक श्री श्याम लाल साहू और क्षेत्रीय संचालक श्री अमरनाथ विश्वकर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों सेवादारों ने प्रातः 8 बजे से 11 बजे तक स्वच्छता अभियान चलाया।
शाहगंज क्षेत्र का नेतृत्व क्षेत्रीय संचालक श्री राजेश कुमार प्रजापति ने किया। इस अभियान में शाखाओं के मुखी, संचालक, शिक्षक, सेवादल के भाई-बहन एवं संगत के महात्माओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। यह प्रयास केवल पर्यावरणीय पहल नहीं, बल्कि अध्यात्म, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय रहा।
सेवा ही सच्ची भक्ति
संत निरंकारी मिशन की सामाजिक शाखा संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान को बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की शिक्षाओं से प्रेरणा मिली। सत्संग के दौरान मुखी श्री ओम प्रकाश विश्वकर्मा ने संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धांजलि शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से दी जाती है। भक्ति केवल वाणी तक सीमित न रहकर व्यवहार में झलकनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सेवा, सुमिरन और सत्संग जीवन का आधार हैं। जब सेवा निष्कपट और स्वार्थरहित होती है, तभी वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।
“संत निरंकारी हेल्थ सिटी” जैसी परियोजनाएं
मिशन द्वारा “संत निरंकारी हेल्थ सिटी” जैसी मानवीय परियोजनाएं भी विकसित की जा रही हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने का प्रयास हैं। यह पहल करुणा, समर्पण और मानव कल्याण की जीवंत मिसाल है।
सत्संग और अनुशासन का समन्वय
अभियान की शुरुआत सेवादल के प्रार्थना गीत से हुई, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा। सभी स्थानों पर एक घंटे का सत्संग भी आयोजित किया गया। आयोजन में सुरक्षा, अनुशासन और स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
उल्लेखनीय है कि संत निरंकारी मिशन समय-समय पर ‘वननेस वन’ वृक्षारोपण अभियान एवं ‘प्रोजेक्ट अमृत’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान देता रहा है।
निस्संदेह, ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है—जो जल की धाराओं में निर्मलता और मन की गहराइयों में चेतना का प्रकाश स्थापित करने का संदेश देता है। यही ऊर्जा आने वाली पीढ़ियों के लिए संतुलित, सुरक्षित और शाश्वत भविष्य की आधारशिला बनेगी।