देवल, ब्यूरो चीफ,ओबरा, सोनभद्र। लोक निर्माण विभाग के खिलाफ ओबरा नगर में गंभीर आरोपों को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विभाग के एक अवर अभियंता (जेई) जितेन्द्र सिंह और एक ठेकेदार की कथित मिलीभगत से लगभग 30 लाख का टेंडर पास कराने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
आरोप है कि सुभाष पेट्रोल पंप से सुभाष चौराहा तक सड़क को कागजों में अत्यधिक जर्जर और गड्डायुक्त दर्शाकर शासन से भारी धनराशि स्वीकृत करा ली गई, जबकि जमीनी स्थिति कथित रूप से उतनी खराब नहीं थी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क पर सामान्य मरम्मत की आवश्यकता हो सकती थी, लेकिन फाइलों में इसे बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त दिखाया गया। नगरवासियों का आरोप है कि विकास कार्य के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग की यह कोशिश सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे के साथ खिलवाड़ है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क की वास्तविक स्थिति और कागजी रिपोर्ट में अंतर पाया जाता है, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला बनता है। मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभिन्न नागरिक संगठनों ने भी शासन से उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना विकास कार्यों पर जनता का विश्वास कायम नहीं रह सकता। नगर में चर्चा है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो
संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उधर लगाए जा रहे आरोपों के बावत जेई जितेन्द्र सिंह ने सेलफोन पर बताया कि करीब 28 लाख रूपए अनुमानित लागत से उक्त सड़क की मरम्मत करायी जा रही है। प्रत्येक पांच वर्ष में सड़क का मरम्मत कार्य कराया जाता है। जनहित में उक्त मार्ग का सामान्य मरम्मत कराया जा रहा है।
