खनन क्षेत्र में गरज रहीं प्रतिबंधित मशीनों की चपेट में आकर कछुए की मौत होने की है चर्चा
देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। ओबरा तहसील अंतर्गत चोपन सोन नदी में आवंटित बालू खनन पट्टा पट्टा के आड़ में प्रतिबंधित मशीनों के जरिए बालू की निकासी कराए जाने से जलीय जीव-जंतु असमय काल के गाल समा रहे हैं। सिंदुरिया गांव के पास सोन नदी के जलधारा में एक कछुआ का शव मिलने से संबंधित जीपीएस युक्त वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उक्त कछुए की मौत सोन नदी में आवंटित बालू खनन क्षेत्र में चल रहीं प्रतिबंधित मशीनों की चपेट में आकर हुई है। हालांकि मृत कछुए से संबंधित वायरल वीडियो का समाचार पत्र नहीं करता है। लेकिन वायरल वीडियो जीपीएस युक्त होने के कारण आमजन में चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सोन नदी में आवंटित बालू खनन क्षेत्र में प्रतिबंधित मशीनों से 24 घंटे बालू की निकासी बेरोकटोक करायी जा रही है। पट्टाधारकों के इशारे पर नदी में बकायदे दर्जनों लिफ्टिंग मशीनें प्रतिदिन गरज रहीं है। इन मशीनों के जरिए नदी के गर्भ से छान कर बालू की निकासी करायी जाती है। जबकि उप खनिज परिहार नियमावली के नियम 42 ज के तहत सोन नदी में लिफ्टिंग मशीनों का प्रयोग वर्जित है। आरोप है कि नदी में बालू खनन के लिए उतारीं गई प्रतिबंधित मशीनों की चपेट में आकर जलीय जीव-जंतु काल के गाल समा रहे हैं। प्रतिदिन कछुओं सहित मगरमच्छ, घड़ियाल व मछलियां लिफ्टिंग मशीन (नाव) की चपेट में आकर अपनी जान गवां रही हैं। बावजूद इसके न तो वन विभाग और न ही जिला प्रशासन इस पर ध्यान दे रहा है। वहीं, मृत कछुए के पास मौजूद कुछ अन्य लोगों का यह भी आरोप रहा कि वन विभाग, खनिज विभाग व स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से पट्टा धारकों द्वारा निमयों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। एनजीटी के सख्त निर्देशों व उप खनिज परिहार नियमावली में दर्ज शर्तों को ताक पर रखकर सोन नदी में आवंटित बालू खनन क्षेत्र से प्रतिबंधित मशीनों के जरिए बालू की खोदायी करायी जा रही है। उधर सोशल मीडिया पर मृत कछुए से संबंधित वायरल वीडियो को लेकर ओबरा रेंजर के सीयूजी नंबर 9415818484 पर काल किया गया तो उन्होंने बताया कि कछुआ बड़ा था न, उसकी स्वभाविक मौत भी हो सकती है। कछुआ हमेशा गहरे पानी में रहता है। बगैर पोस्टमार्टम कराए यह सिद्ध नहीं किया जा सकता कि उसका मौत कैसे हुआ होगा। कहा कि सोन नदी में घड़ियाल अब कहां पाए जाते हैं।
