देवल, ब्यूरो चीफ,डाला, सोनभद्र। उत्तर प्रदेश सरकार की निषाद राज बोट योजना के अंतर्गत जनपद सोनभद्र में नाव वितरण प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। निषाद पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद ने सहायक मत्स्य निदेशक, सोनभद्र को लिखित रूप से अवगत कराते हुए मांग की थी कि नाव वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाया जाए तथा बिना लाभार्थी की मौजूदगी और मौके पर नई नाव उपलब्ध कराए बिना किसी भी स्थिति में वितरण की कार्यवाही मान्य न की जाए। इस पत्र के बाद मत्स्य विभाग द्वारा योजना के अंतर्गत चिन्हित लाभार्थियों में से तीन लाभार्थियों को नाव वितरण किया गया, लेकिन मौके पर जो तस्वीर सामने आई, वह शासन की मंशा पर सवाल खड़े करती है। सूत्रों ने बताया कि स्थलीय निरीक्षण में तमाम खामियां उजागर हुई है। मसलन अधूरी बनी नावों को जल्दबाजी में दिखावटी रूप से तैयार किया गया। पुरानी और इस्तेमाल हुई नावों पर केवल डेंटिंगदृपेंटिंग कर उन्हें नई नाव बनाया गया है। विभागीय औपचारिकताएं पूरी करते हुए लाभार्थियों के नाम वितरण की कार्यवाही दर्शा दी गई है। यह पूरा प्रकरण यह संकेत देता है कि सरकारी धन के दुरुपयोग में जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कोताही नहीं बरती। योजना का उद्देश्य मछुआ समुदाय को आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन जिस तरह से कागजी खानापूर्ति कर नाव वितरण दिखाया गया, वह न केवल शासन की मंशा के विपरीत है बल्कि एक बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। स्थानीय लोगों और निषाद समाज में इसको लेकर भारी रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह योजनाओं में अनियमितताएं चलती रहीं तो जनपद सोनभद्र का मत्स्य विभाग भी आने वाले समय में बड़े घोटालों में अहम भूमिका निभाने वाला विभाग बनकर रह जाएगा। अब आवश्यकता है कि शासन स्तर से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों
पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि निषाद समाज के हक पर डाका डालने वालों को स्पष्ट संदेश मिल सके।
.jpeg)