ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बने सफल मधुमक्खी पालक दयाशंकर
कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर । जिले के ग्रामीण इलाकों में एक नई कहानी गूंज रही है, जो मेहनत और सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का बेहतरीन उदाहरण पेश करती है। ग्राम कबीरपुर कसेरूआ, विकास खण्ड अकबरपुर के निवासी दयाशंकर पुत्र माताप्रसाद ने उद्यान विभाग के सहयोग से मधुमक्खी पालन का कार्य शुरू किया। आज यह कार्य न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। वह राष्ट्रीय बाजार तक छाए हुए हैं।
दयाशंकर ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत सहायता प्राप्त कर मधुमक्खी पालन की शुरुआत की। यह योजना केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल है, जो बागवानी के साथ-साथ मधुमक्खी पालन, फूलों की खेती, शाक-सब्जियों और मशीनीकरण को बढ़ावा देती है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने किसानों को स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान करने के लिए इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया है। मधुमक्खी पालन के माध्यम से न केवल शहद उत्पादन बढ़ता है, बल्कि फसलों के परागण से कृषि उत्पादकता में भी सुधार होता है।
*डाबर व पतंजलि तक पहुंचा दयाशंकर का शहद*
वर्तमान में दयाशंकर 500 बॉक्स (छत्ते) के साथ मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। उनके पास शहद निष्कासन के लिए आवश्यक आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध हैं। एक वर्ष में वे लगभग 500 कुंतल यानी 50 हजार किलोग्राम शुद्ध शहद का उत्पादन कर रहे हैं। यह शहद स्थानीय बाजारों से लेकर लखनऊ तक बिकता है।खास बात यह है कि उनका शहद देश की प्रमुख कंपनियों जैसे डाबर, हमदर्द और पतंजलि तक पहुंच रहा है। ये कंपनियां उच्च गुणवत्ता वाले शहद की मांग करती हैं, और दयाशंकर जी की मेहनत से उत्पादित शहद इस मानक पर खरा उतरता है।
*मौन वंश की भी कर रहे बिक्री*
शहद की बिक्री के अलावा वे मौनवंश (मधुमक्खी कॉलोनियों) की बिक्री भी कर रहे हैं। यह बिक्री कई कृषि विज्ञान केंद्रों और अन्य संस्थानों में हो रही है, जैसे एस.एस.बी. महाराजगंज, बलरामपुर, बहराइच, कृषि विज्ञान केंद्र आजमगढ़, मऊ, अमेठी, सुल्तानपुर आदि। मौनवंश की बिक्री से अतिरिक्त आय का स्रोत खुला है, जो अन्य किसानों और युवाओं को भी मधुमक्खी पालन की ओर प्रेरित कर रहा है। सभी खर्चों को घटाने के बाद श्री दयाशंकर को सालाना 10.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। यह राशि न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि गांव में रोजगार के नए द्वार भी खोल रही है।
*पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है व्यवसाय*
मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें कम जगह और मध्यम निवेश से अच्छी कमाई संभव है। साथ ही यह पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है, क्योंकि मधुमक्खियां फसलों के बेहतर परागण में मदद करती हैं।
*दयाशंकर जैसे किसान पूरे समाज को दे रहे दिशा*
जिला उद्यान अधिकारी धर्मेंद्र चंद्र चौधरी ने बताया कि अम्बेडकरनगर जिला अब मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में एक नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। दयाशंकर जैसे सफल किसान न केवल अपनी तकदीर बदल रहे हैं, बल्कि पूरे समाज को नई दिशा दे रहे हैं। यदि आप भी मधुमक्खी पालन में रुचि रखते हैं, तो निकटतम उद्यान विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। स्वरोजगार का यह रास्ता निश्चित रूप से उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जा रहा है।