देवल संवाददाता, आज़मगढ़ । जिले में बैंकिंग व्यवस्था मंगलवार को पूरी तरह ठप रही। पांच दिवसीय सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर सभी बैंक कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। राष्ट्रीयकृत, ग्रामीण, सहकारी समेत निजी बैंकों के ताले नहीं खुले, जिससे आम खाताधारकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मंगलवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू न किए जाने के विरोध में जिले के सभी बैंकों के कर्मचारी एवं अधिकारी हड़ताल पर रहे। इसका असर राष्ट्रीयकृत, ग्रामीण, सहकारी तथा देशी-विदेशी निजी बैंकों पर भी पड़ा और शहर भर में बैंक बंद रहे।
शहर के सभी बैंक कर्मचारी मुख्य रूप से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रैदोपुर शाखा पर एकत्रित हुए, जहां विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान विभिन्न बैंक यूनियनों के पदाधिकारियों ने उपस्थित कर्मियों और खाताधारकों को हड़ताल के कारणों से अवगत कराया।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के कन्वेनर विष्णु गुप्ता ने कहा कि भारत युवाओं का देश है, जहां युवा रोजगार के साथ-साथ वर्क लाइफ बैलेंस भी चाहता है। संयुक्त परिवार की परंपरा कमजोर होने के बाद पति-पत्नी दोनों को काम करना पड़ता है, ऐसे में दो दिन का साप्ताहिक अवकाश बेहद जरूरी है। उन्होंने वैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि इससे स्वास्थ्य बेहतर होता है और कार्यक्षमता भी बढ़ती है।
स्टेट बैंक के अमित सिंह ने कहा कि आज भारतीय बैंक विश्व के उन्नत बैंकों की बराबरी कर रहे हैं। कोर बैंकिंग, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, कियोस्क बैंकिंग जैसी तकनीकों के दौर में शनिवार को काम करने की आवश्यकता ही नहीं रह गई है। उन्होंने बताया कि देश में करोड़ों डेबिट-क्रेडिट कार्ड यूजर और अरबों मोबाइल बैंकिंग उपयोगकर्ता हैं, ऐसे में सरकार को तुरंत पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करनी चाहिए।
बैंक ऑफ बड़ौदा के जनार्दन कुमार ने कहा कि आठ घंटे काम और पर्याप्त अवकाश की अवधारणा कोई नई नहीं है। वर्ष 1817 में रॉबर्ट ओवन और 1862 में कोलकाता के रेलवे मजदूरों ने इसकी वकालत की थी। फोर्ड मोटर कंपनी ने भी 1926 में दो दिन का साप्ताहिक अवकाश लागू कर दिया था।
केनरा बैंक के दुर्गेश ने बताया कि वर्ष 2015 में तत्कालीन एसबीआई चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य ने सभी शनिवार बंद करने का आश्वासन दिया था। इसके अलावा 11वें वेतन समझौते (2023) और मार्च 2024 में हुए समझौते में भी पांच दिवसीय बैंकिंग पर सहमति बनी थी, लेकिन सरकार ने अब तक इसे लागू नहीं किया, जो कर्मचारियों के साथ धोखा है।
धरने में यूनियन बैंक से रिज़वान अहमद, धीरज चौधरी, विकास सिंह, योगेंद्र यादव, स्टेट बैंक से अमित सिंह, बैंक ऑफ बड़ौदा से सरफराज, केनरा बैंक से अश्वनी सहित यूको बैंक व अन्य बैंकों के सैकड़ों कर्मचारी-अधिकारी शामिल रहे।
इस दौरान हड़ताली कर्मियों ने दोपहिया वाहन जुलूस भी निकाला, जो स्टेट बैंक रैदोपुर से दुर्गा मंदिर, एक्सिस बैंक, एलवल त्रिमुहानी, HDFC बैंक, शहीद द्वार, अग्रसेन तिराहा और सिविल लाइन चौराहा होते हुए पुनः स्टेट बैंक पहुंचा।