देवल, ब्यूरो चीफ,डाला, सोनभद्र। लाख पावंदियों के बावजूद बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में संचालित मे. बजरंग स्टोन पत्थर खदान से नियम विरूद्ध खनन कार्य पर अंकुश न लगने से खनन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों सहित स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। इस पत्थर खदान के पट्टाधारक की ऊंची पहुंच के आगे सारे नियम-कानून महज कागज के पन्नों में ही सिमट कर रह गए हैं।
भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि सरकारी दर 164 रूपए से काफी अधिक मूल्य पर परमिट की काली बाजारी करने के साथ ही हैबी ब्लास्टिंग के जरिए पत्थर की निकासी कराए जाने के आरोप को लेकर मे. बजरंग स्टोन की खदान इन दिनों काफी चर्चा है। वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन पट्टेदार द्वारा जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है, बावजूद इसके खनन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ ही स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। बताया कि इस खदान में भारी ब्लास्टिंग का खुलेआम प्रयोग किए जाने से आसपास के गांवों में कंपन, मकानों में दरारें और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, ब्लास्टिंग से पहले न तो कोई सूचना दी जाती है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है। आरोप यह भी है कि उत्तर प्रदेश उपखनिज परिहार नियमावली 2021 और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के प्रावधानों की अनदेखी कर मे. बजरंग स्टोन की खदान से पत्थर की निकासी करायी जा रही है। नियमों के अनुसार सीमित खनन, नियंत्रित विस्फोट और पर्यावरणीय स्वीकृति अनिवार्य है, लेकिन इन नियमों को ताक पर रखकर खनन किए जाने की बात कही जा रही है। मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। बताया जा रहा है कि मे. बजरंग स्टोन खदान में एक दिन में मात्र 60 टिपर ही बोल्डर निकाला जा सकता है, लेकिन खनन सर्वेयर और विभाग की मिलीभगत में प्रतिदिन सैकड़ों टिपर बोल्डर निकाला जा रहा है। उधर लगाए जा रहे आरोपों के बावत जेष्ठ खान अधिकारी से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे मौजूद नहीं मिले। लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
