कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।जनपद अंबेडकर नगर का दोस्तपुर चौराहा अब 'जाम का राजा' बन चुका है—और इसके ताज का हीरा है नया बना ई-रिक्शा स्टैंड! पहले से ही संकरी सड़कों और अनियंत्रित ट्रैफिक से त्रस्त यह इलाका, अब अवैध स्टैंड के कारण घंटों की कैद में बदल गया है। लेकिन सबसे बड़ी मार? यहां ट्रैफिक सिग्नल का नामोनिशान तक नहीं! प्रशासन की यह 'सुपर फेल्योर' न सिर्फ लोगों की जिंदगी को नर्क बना रही है, बल्कि अफसरों की 'आंखों पर पट्टी' और 'कानों में रुई' को भी बेनकाब कर रही है। विकास का ढोल पीटते हो, लेकिन बुनियादी सुविधा? जीरो!सुबह का वक्त: स्कूल बसें, ऑफिस जाने वाले, दुकानदारों के ट्रक—सब एक-दूसरे में उलझकर खड़े। ई-रिक्शा स्टैंड ने चौराहे को 'पार्किंग जोन' बना दिया है, जहां दर्जनों रिक्शे बेतरतीब खड़े होकर रास्ता ब्लॉक कर रहे हैं। कोई सिग्नल नहीं, कोई पुलिस वाला नहीं, बस हॉर्न की कर्कश सिम्फनी और गुस्से का विस्फोट। स्थानीय निवासी श्यामलाल गुप्ता फटकारते हुए कहते हैं, "चौराहे को स्टैंड बना दिया, लेकिन सिग्नल लगाने की सुधि तक नहीं! प्रशासन हमें जाम में सड़ने के लिए छोड़ गया है क्या?"यह फैसला कब और कैसे लिया गया, कोई रिकॉर्ड नहीं। कोई ट्रैफिक सर्वे? ना। कोई वैकल्पिक जगह? जीरो। बस, ऊपर से 'हुक्म' हुआ और नीचे के अफसरों ने चौराहे पर 'बम' फोड़ दिया। नतीजा? यहां कम से कम 4 घंटे का जाम रोजाना, जिसमें एक एम्बुलेंस भी फंसकर मरीज की जान जोखिम में डाल चुकी है। सवाल यह है: जब सिग्नल ही नहीं, तो ई-रिक्शा स्टैंड बनाने का मतलब क्या? जाम को 'ऑफिशियल' करना? प्रशासन के 'जीनियस' प्लानर अब क्या कहेंगे—कि "हम तो बस ईको-फ्रेंडली थे"?पूरे कस्बे में ट्रैफिक सिग्नल का इंतजार सालों से है, लेकिन जिला मुख्यालय के अफसरों को शायद 'सपनों की दुनिया' में मजा आ रहा है। सड़कें टूटी, फुटपाथ कब्जे में, और पुलिस? वो तो चौराहे से कोसों दूर चाय पी रही है। ई-रिक्शा अच्छी पहल हैं, लेकिन बिना प्लानिंग के इन्हें ठूंसना तो आत्मघाती कदम है! व्यापारी संघ के नेता चेताते हैं: "सिग्नल नहीं लगेगा, जाम नहीं हटेगा—to हम सड़क पर उतरेंगे। यह लापरवाही नहीं, जनता के साथ धोखा है!"जिला मजिस्ट्रेट साहब, सुन रहे हो? लोग पूछ रहे हैं—कब लगेगा सिग्नल? कब हटेगा यह 'जाम जनरेटर' स्टैंड? या फिर अगली मीटिंग में सिर्फ फाइलें घुमाई जाएंगी? दोस्तपुर रोड के लोग अब थक चुके हैं। यह चौराहा जाम का नहीं, प्रशासन की नाकामी का 'लाइव शो' बन चुका है।
दोस्तपुर चौराहा- ई-रिक्शा स्टैंड ने जाम को बनाया 'परमानेंट हेल', ट्रैफिक सिग्नल तो दूर की कौड़ी!
नवंबर 02, 2025
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