कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर । जिला अम्बेडकरनगर के थाना जलालपुर क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां स्थानीय पुलिस ने बिना किसी पूर्व जांच या साक्ष्य के महज नशे में धुत व्यक्ति के द्वारा विवाद के आधार पर 5 निर्दोष नागरिकों के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कर लिया। पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे प्रार्थना पत्र में थाना जलालपुर के मुकदमा पंजीकृत करने वाले अधिकारी को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है, जिन्होंने शिकायतकर्ता की मनगढ़ंत कहानी पर आंख मूंदकर एफआईआर दर्ज की, जिससे निर्दोष परिवार की जिंदगी दांव पर लग गई।घटना 4 नवंबर 2025 की शाम करीब 7:30 बजे की बताई जा रही है। मुकदमा संख्या 506/2025 के तहत धारा 191(2), 115(2), 352, 351(3), 333 बीएनएस के अंतर्गत प्रवीण कुमार (पुत्र हीरालाल), उनकी पत्नी कंचन, शाहिल (पुत्र होरीलाल), मोनिका (पुत्री होरीलाल) और काजल (पुत्री होरीलाल) को नामजद किया गया है। प्रार्थना पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि मुकदमा पंजीकृत करने वाले अधिकारी ने वादी की शिकायत को बिना क्रॉस-वेरिफाई किए सीधे एफआईआर में तब्दील कर दिया, जबकि सभी आरोपी उस समय अपने-अपने कामों में व्यस्त थे।प्रवीण कुमार, जो एक हेयर कटिंग सैलून चलाते हैं, घटना के समय अपनी दुकान पर ग्राहकों को सेवा दे रहे थे। उनकी पत्नी कंचन घर पर थीं, जबकि मोनिका और काजल भी घर में ही मौजूद थीं। शाहिल पढ़ाई के लिए शाहपुर चौराहे की लाइब्रेरी में गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वादी का घर प्रार्थियों के घर से काफी दूर और पीछे की तरफ स्थित है, जहां इनका कोई आना-जाना नहीं है। फिर भी, पुरानी रंजिश के चलते वादी ने कूटरचित तरीके से इनके नाम एफआईआर में घसीट लिए। मुकदमा पंजीकृत होने की जानकारी पीड़ित को चार दिन पश्चात गुलाम रसूल उपनिरीक्षक द्वारा दी गई तब पीड़ित को यह पता चला कि परिवार वालों के ऊपर मुकदमा दर्ज हुआ है।ग्रामीणों का कहना है कि थाना जलालपुर का यह अधिकारी शिकायत मिलते ही बिना घटनास्थल की जांच, गवाहों के बयान या किसी सबूत के एफआईआर दर्ज करने में माहिर हो गया है, जिससे क्षेत्र में पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। "यह सरासर अन्याय है। अधिकारी ने वादी की बात को सच मानकर निर्दोषों को फंसाया, जबकि बुनियादी जांच तक नहीं की," एक स्थानीय निवासी ने बताया।पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि उनके नाम तत्काल मुकदमा से हटाए जाएं और दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हो। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस कप्तान से उच्च स्तरीय जांच की उम्मीद की जा रही है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।यह घटना पुलिस सुधारों की पोल खोलती है, जहां बिना जांच के मुकदमा दर्ज करना आम बात हो गई है। देखना यह है कि एसपी महोदय इस प्रार्थना पत्र पर क्या कार्रवाई करते हैं।
बिना जांच के फर्जी मुकदमा दर्ज करने पर थाना जलालपुर के अधिकारी पर ग्रामीणों का गुस्सा, 5 निर्दोषों के नाम काटने की मांग
नवंबर 11, 2025
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