देवल संवाददाता, गोरखपुर ।जिले में तेजी से फैल रहे नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर अब शासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। बताया जा रहा है कि यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है। कार्रवाई की शुरुआत करते हुए शासन ने औषधि विभाग के एक कर्मचारी मोहन जी तिवारी को निलंबित कर दिया है।
हालांकि, विभाग में उच्च पदों पर बैठे अधिकारी इस कार्रवाई से अछूते रह गए हैं। मोहन को दवा कारोबारियों से औषधि अनुज्ञप्तियां जारी कराने के नाम पर रिश्वत मांगने, भ्रामक जानकारी देकर गुमराह करने और धमकाने के आरोप में निलंबित किया गया है।
कुछ दिन पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने दवा की थोक मंडी भालोटिया में छापेमारी कर तीन व्यापारियों को गिरफ्तार किया था। इस दौरान करोड़ों रुपये की नशीली दवाएं बरामद हुईं, जिससे गोरखपुर से देश के कई राज्यों तक फैले ड्रग नेटवर्क का खुलासा हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क की पहुंच ड्रग विभाग के भीतर तक है, जहां से उन्हें संरक्षण मिलता रहा। इस नेटवर्क का दायरा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मुंबई, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम तक फैला पाया गया है। इसके बावजूद स्थानीय ड्रग विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया। दवा माफिया के प्रभाव और गठजोड़ के आगे विभाग ने मौन साध लिया।
इस मामले में कई व्यापारी संगठनों ने शासन से शिकायत की, जिसके बाद मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर औषधि विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मोहन जी तिवारी को निलंबित करते हुए वाराणसी मंडल कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि तिवारी का प्रभाव उसके पद से कहीं अधिक था। एक वरिष्ठ दवा व्यापारी नेता का कहना है कि तिवारी पर कार्रवाई सिर्फ प्रतीकात्मक है ताकि विभाग की बड़ी हस्तियों को बचाया जा सके। शासन की यह कार्रवाई विभाग की साख पर लगे दाग को ढकने का प्रयास प्रतीत हो रही है।