राकेश, देवल ब्यूरो।डाला सोनभद्र। जनपद में अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं नदियों की जलधारा को रोक कर तो कहीं निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक भूभाग पर अवैध खनन किया जा रहा है। अवैध खनन करने के लिए नई-नई तरकीबों के अलावा कोई भी मौका नहीं छोड़ा जा रहा है। अवैध खनन में लिप्त ठेकेदारों से लेकर पट्टा धारकों एवं विभागीय अधिकारियों तक जिसे जब जहां मौका मिल रहा है अवैध खनन के लिए कमर कसे हुए हैं। इसी तरह के एक मामले को लेकर जनपद के चोपन स्थित डाला वन रेंज की कार्यप्रणाली पर बालू के अवैध खनन को लेकर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। जहां एक तरफ डाला वन रेंजर का दावा है कि उनके क्षेत्र में अवैध खनन बंद है तो वहीं दूसरी ओर डाला वन रेंज से कुछ ही दूरी पर खुलेआम अवैध खनन हो रहा है। सूत्रों की माने तो अवैध खनन करने में वह लोग लिप्त हैं जिन्हें डाला रेंजर कार्यालय से संरक्षण प्राप्त है। डाला वन रेंज कैंप आवास के पीछे बड़े पैमाने पर मिट्टी के टीले से बालू का अवैध खनन किया जा रहा है जहां ट्रैक्टर ट्राली व वह जेसीबी के पहियों के निशान देखे जा सकते हैं। इस बात की जानकारी जैसे ही स्थानीय लोगों को हुई अवैध खनन बंद कर दिया गया। मामले को लेकर जब डीएफओ ओबरा से बात की गई तो जांच की बात कही, वहीं वन विभाग क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि वन विभाग कार्य हेतु बालू ,निजी कार्य के लिए लाईं जा रही है, लेकिन पत्रकारों को अवैध ही दिखाई देता है एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं डाला रेंजर का कहना है कि उक्त जगह से मिट्टी का खनन नर्सरी के लिए किया जा रहा था। सबसे बड़ा प्रश्न यह है की क्या नर्सरी हेतु मिट्टी का खनन सिर्फ डाला रेंज के लिए ही था और उक्त खनन के लिए परमिशन ली गई थी या नहीं। मिट्टी खनन की आड़ में बालू का अवैध खनन होना अपने आप में संदेह की स्थिति उत्पन्न करता है और संलिप्त अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े करता है।
