कृष्ण कुमार तिवारी, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर दैनिक देवल। नगर पंचायत जहागीरगंज में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम के गहन चेकिंग अभियान चलाया गया। जिसमें चेकिंग के दौरान दो अस्पतालों को सीज करने की करवाई की गई। इस दौरान अवैध अस्पतालों में भगदड़ मची रही। कोई कहीं और से कोई कहीं और से मैनेज करता हुआ दिखाई दिया ।जो मैनेज नहीं कर पाया उनके ऊपर वक्र दृष्टि पड़ी और जो मैनेज कर ले गया उसके ऊपर रहम दृष्टि पड़ी स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से जहां पर दो अस्पताल सीज किए गए। अस्पताल सीज करने की वजह जानकर भी लोग हैरान रह गए। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से आम जनमानस में चर्चा का माहौल बन गया।बता दें कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा समय-समय पर जनपद के विभिन्न बाजारों में नाम मात्र की कार्रवाई की जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ऐसी कार्रवाई करने का कोई नियम कायदे से जांच नहीं की जाती है। उनका मन होता है तो नोटिस देकर महीना दो महीने का समय देते हैं तो उनका मन नहीं करता है तो तुरंत उस अस्पताल को सीज करने की कार्रवाई भी पूरी कर देते हैं। ठीक इसी तरह से शनिवार को नगर पंचायत जहागीरगंज में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई देखने को मिला। बताया जाता है कि नगर पंचायत जहागीरगंज में सिर्फ तीन अस्पतालों पर ही जांच किया गया और उनमें दो अस्पतालों को सीज करने की कार्रवाई की गई।
बता दे की अमन हॉस्पिटल पूरी तरह से रजिस्टर्ड हॉस्पिटल है। इस बात की जानकारी स्वयं सीएचसी प्रभारी उदय चंद्र यादव ने कुछ दिन पहले पूछने पर यह स्वीकार किया था। कुछ दिन पहले सीएचसी प्रभारी उदय चंद यादव से बात करने पर उन्होंने इस बात को बताया था लेकिन जब आज दोबारा पूछने पर कि अमन हॉस्पिटल को सीज करने पर किस नियम कायदे को ध्यान में रखकर सीज किया गया तो उन्होंने बताया कि अस्पताल के लाइसेंस पर जिस डॉक्टर का नाम अंकित किया गया है मौके पर वह डॉक्टर नहीं मिले जिसकी वजह से अस्पताल को सीज करने की कार्रवाई की गई।सवालों के घेरे में सीज करने की कार्रवाई- बता दे की नगर पंचायत जहागीरगंज में दर्जनों की संख्या में अवैध पैथोलॉजी सेंटर अवैध अस्पतालों की भरमार है। इस बात की जानकारी आए दिन अखबारों में प्रकाशित होता है। लेकिन उच्च अधिकारियों को मामले में संज्ञान होने पर भी कभी भी सीज करने की कार्रवाई नहीं करते हैं क्योंकि कहीं ना कहीं इन्हीं अवैध अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों से अधिकारियों की जेब गर्म होती है इस बात का अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं कि क्या जहांगीरगंज में सिर्फ दो ही अवैध अस्पताल हैं और जिन दो अस्पतालों को सीज किया गया उनके पास बाकायदा हर तरह से कागज उपलब्ध हैं। सिर्फ यह कहकर अस्पतालों को सीज किया गया कि जिस डॉक्टर का नाम लाइसेंस पर अंकित है वह डॉक्टर मौके पर नहीं थे तो बता दें कि एक एमबीबीएस डॉक्टर सप्ताह के सातों दिनों में अस्पताल पर मौजूद नहीं रहता है। माना कि एमबीबीएस डॉक्टर को अस्पताल पर हर समय मौजूद रहना चाहिए क्या जहागीरगंज में जितने भी अवैध पैथोलॉजी सेंटर अवैध अस्पताल हैं और जिनका रजिस्ट्रेशन हो चुका है क्या उनके यहां पर सप्ताह के सातों दिन डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं।इस विषय में डिप्टी सीएमओ डॉ संजय कुमार वर्मा से जानकारी करने का प्रयास किया गया तो एक बार काल गई तो काल काट कर मोबाइल को स्विच ऑफ कर लिए।