अमेरिका-ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के बाद समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (डीजीएमए) ने बुधवार को जारी एक आदेश में जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधकों और भर्ती कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को तैनात न करें।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत दुनिया में समुद्री कर्मचारियों (सीफेयरर्स) का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर है और दुनिया भर में जहाजों पर 3,00,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। यह कदम पिछले तीन दिनों में इस इलाके में जहाजों पर हुए अलग-अलग हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत के बाद उठाया गया है।
केंद्र का जहाज मालिकों और जहाज प्रबंधकों को नोटिस
बुधवार (15 जुलाई, 2026) के अपने आदेश में डीजीएमए ने जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधकों और भर्ती करने वाली कंपनियों को निर्देश दिया कि वे अगले आदेश तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को तैनात न करें। कमर्शियल जहाजों पर हालिया हमलों ने संघर्ष वाले इलाके में काम करने वाले नाविकों के लिए जोखिम काफी बढ़ा दिया है।
'सावधानी बरतने वाले उपाय अपनाना जरूरी'
नोटिस में कहा गया है, "कंपनियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अगले आदेश तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को तैनात न करें।" आदेश में कहा गया, "फारस की खाड़ी इलाके में सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए डायरेक्टरेट का मानना है कि इस इलाके में चलने वाले जहाजों पर काम कर रहे भारतीय नाविकों के हितों की सुरक्षा के लिए ज्यादा सावधानी बरतने वाले उपाय अपनाना जरूरी है।"
नियामक ने जहाजों के मालिकों को फारस की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और आस-पास के जल में सुरक्षा स्थिति के प्रति सतर्क रहने और नौवहन चेतावनियों की लगातार निगरानी करने के लिए भी कहा। नोटिस में आगे कहा गया, "डीजीएमए सुरक्षा की बदलती स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
