आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। अनुदानित मदरसा इस्लामिया, गिरधरपुर के प्रधानाचार्य डॉ. इदरीस अहमद खान के खिलाफ मिली शिकायतों के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। विभागीय स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानाचार्य का वेतन फिलहाल रोक दिया गया है, जबकि उनकी उपस्थिति और कार्यप्रणाली से जुड़े कई अभिलेख तलब किए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद वाराणसी मंडल के उप निदेशक (अल्पसंख्यक कल्याण) विजय प्रताप यादव ने मामले की जांच की। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रधानाचार्य शिक्षण अवधि के दौरान मदरसे में उपस्थित रहने के बजाय शहर के नवाब यूसुफ रोड स्थित निजी क्लीनिक में चिकित्सकीय प्रैक्टिस करते हैं। जांच के दौरान अधिकारी कथित तौर पर मरीज बनकर क्लीनिक पहुंचे, जहां उन्हें प्रधानाचार्य मरीजों को देखते हुए मिले। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी।
विभाग ने प्रधानाचार्य के पिछले छह माह की जीपीएस लोकेशन, मदरसा और क्लीनिक की सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। शिकायत में फर्जी हस्ताक्षर कर वेतन आहरित करने, मदरसे में घटती छात्र संख्या और उपस्थिति रजिस्टर में कथित अनियमितताओं जैसे आरोप भी लगाए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
वहीं, प्रधानाचार्य डॉ. इदरीस अहमद खान ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि जिस दिन की घटना का उल्लेख किया जा रहा है, उस दिन उनकी तबीयत खराब थी और वे स्वयं इलाज कराने क्लीनिक गए थे। उन्होंने दावा किया कि क्लीनिक का संचालन उनके पुत्र द्वारा किया जाता है तथा वे नियमित रूप से मदरसे में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गंगाराम गौतम ने कहा कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी मिली है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं ड्रग इंस्पेक्टर रजत पांडेय ने अवकाश पर होने की बात कहते हुए ड्यूटी पर लौटने के बाद मामले की समीक्षा करने की बात कही।
उधर, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अनीता से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। चूंकि जांच उनके विभाग के स्तर पर भी चल रही है, इसलिए विभागीय रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं या नहीं, और संबंधित अधिकारियों द्वारा आगे क्या प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है।
