देवल संवाददाता, उल्लेखनीय है कि दिनांक 12.03.2026 को एसटीएफ लखनऊ एवं थाना गम्भीरपुर पुलिस को सूचना प्राप्त हुई थी कि *छत्तीसगढ़ राज्य से भारी मात्रा में अवैध गांजा कंटेनर वाहन के माध्यम से उत्तर प्रदेश* लाया जा रहा है। सूचना के आधार पर अमौड़ा टोल प्लाजा के समीप संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया गया। वाहन संख्या UP-79 AT-9418 की तलाशी के दौरान उसमें विशेष रूप से निर्मित गुप्त कैविटी से *14 बोरियों में कुल 353.990 किलोग्राम अवैध गांजा* बरामद हुआ, जिसकी *अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत लगभग 01 करोड़ 77 लाख* रुपये थी। मौके से *अभियुक्त राजीव कुमार यादव* उर्फ संजीव कुमार उर्फ संजू पुत्र तिलक सिंह, निवासी ग्राम सुरायदा फूलपुर, थाना अजीतमल, जनपद औरैया को गिरफ्तार किया गया तथा थाना गम्भीरपुर पर मु0अ0सं0 71/2026, धारा 8/20/29/60 एनडीपीएस एक्ट पंजीकृत किया गया। तस्करी में प्रयुक्त *कंटेनर वाहन को उसी समय विधिक रूप से सीज कर पुलिस अभिरक्षा* में लिया गया था। दिनांक 22.06.2026 को सक्षम प्राधिकारी द्वारा फ्रीजिंग आदेश की पुष्टि के उपरांत *SAFEM (FOP)A एवं NDPS एक्ट, नई दिल्ली द्वारा 10.50 लाख रुपये मूल्य के तस्करी में प्रयुक्त कंटेनर वाहन का विधिक जब्तीकरण* किया गया था।
जनपद *आजमगढ़ से लगभग 354 किलोग्राम व जनपद जौनपुर से 250 किलोग्राम अर्थात कुल 604 किलोग्राम अवैध गांजा अभियुक्त राजीव कुमार यादव से बरामद* किया जा चुका है।
*वित्तीय विवेचना में हुआ बड़ा खुलासा*
विवेचना के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि अभियुक्त द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित अवैध धनराशि का निवेश कर कंटेनर वाहन खरीदा गया था, जिसका मूल्य लगभग 10.50 लाख रुपये पाया गया।
थाना गम्भीरपुर पुलिस द्वारा धारा 68F NDPS Act के अंतर्गत वाहन को फ्रीज कर सम्पूर्ण प्रकरण Competent Authority & Administrator, SAFEM (FOP)A एवं NDPS Act, नई दिल्ली को भेजा गया। उपलब्ध साक्ष्यों एवं वित्तीय जांच के आधार पर सक्षम प्राधिकारी ने वाहन को Illegally Acquired Property मानते हुए फ्रीजिंग आदेश की पुष्टि की तथा विधिक जब्तीकरण की कार्रवाई सम्पन्न कराई।
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा तस्कर के विरूद्ध 01 वर्ष के लिए निरोधादेश किया गया पारित। अभियुक्त के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों, उसके विस्तृत आपराधिक इतिहास, संगठित मादक पदार्थ तस्करी में सक्रिय भूमिका, जमानत पर छूटकर पुनः अपराध करने की प्रवृत्ति तथा समाज एवं लोक व्यवस्था पर पड़ने वाले गंभीर प्रतिकूल प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए उत्तर प्रदेश शासन, गृह (गोपन) अनुभाग-5 द्वारा दिनांक 07 जुलाई 2026 को PIT-NDPS Act, 1988 की धारा 3(1) के अंतर्गत एक वर्ष का निरोधादेश पारित किया गया। उक्त आदेश की तामिला दिनांक 08.07.2026 को जिला कारागार अधीक्षक, आजमगढ़ के माध्यम से विधिवत कराया गया।
*अभियुक्त को PIT-NDPS Act के अंतर्गत निरुद्ध (Preventive Detention) किए जाने के प्रमुख आधार*
1. अभ्यस्त एवं संगठित मादक पदार्थ तस्कर (Habitual & Organized Drug Trafficker): अभियुक्त मादक पदार्थों की अवैध तस्करी (Illicit Drug Trafficking) में निरंतर संलिप्त पाया गया तथा संगठित रूप से इस अवैध कारोबार का संचालन करता है।
2. गंभीर आपराधिक इतिहास एवं पुनरावृत्ति (Criminal Antecedents & Recidivism): अभियुक्त के विरुद्ध पूर्व से NDPS Act, गैंगस्टर एक्ट एवं अन्य आपराधिक धाराओं में अभियोग पंजीकृत हैं, जिससे उसकी अपराध प्रवृत्ति एवं पुनरावृत्ति (Recidivism) स्पष्ट होती है।
3. जमानत के उपरांत पुनः अपराध (Violation of Bail Conditions & Reoffending): जमानत (Bail) अथवा रिहाई के पश्चात भी अभियुक्त पुनः मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त पाया गया, जिससे उसकी अपराध करने की निरंतर प्रवृत्ति परिलक्षित होती है।
4. व्यावसायिक मात्रा की बरामदगी (Recovery of Commercial Quantity): अभियुक्त एवं उसके सहयोगियों के कब्जे से Commercial Quantity में गांजा बरामद हुआ, जो अवैध मादक पदार्थ तस्करी (Illicit Drug Trafficking) का स्पष्ट प्रमाण है।
5. संगठित तस्करी नेटवर्क का संचालन (Operation of Drug Syndicate): अभियुक्त अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मादक पदार्थों के परिवहन, भंडारण एवं विक्रय (Transportation, Storage & Distribution) का संगठित नेटवर्क संचालित करता है।
6. समाज एवं युवाओं पर दुष्प्रभाव (Adverse Impact on Society & Youth): अभियुक्त की गतिविधियों से समाज, विशेषकर युवाओं में नशे की प्रवृत्ति (Drug Abuse) को बढ़ावा मिलने तथा सामाजिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है।
7. पुनः अपराध की प्रबल संभावना (Likelihood of Reoffending): अभियुक्त के रिहा होने पर पुनः मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त होने की प्रबल संभावना है, जिससे भविष्य में भी ऐसे अपराध कारित होने की आशंका बनी रहती है।
8. लोक-शांति एवं सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा (Threat to Public Order & Public Safety): अभियुक्त की गतिविधियाँ लोक-शांति (Public Order), जनसुरक्षा (Public Safety) एवं सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं।
9. बहु-जनपदीय आपराधिक इतिहास (Inter-District Criminal Record): अभियुक्त के विरुद्ध जनपद आजमगढ़, जौनपुर एवं औरैया के विभिन्न थानों पर NDPS Act, गैंगस्टर एक्ट एवं अन्य आपराधिक धाराओं में कुल 05 अभियोग पंजीकृत हैं, जो उसकी Habitual Offender एवं Organized Drug Trafficker के रूप में निरंतर आपराधिक गतिविधियों तथा Inter-District Drug Trafficking Network में सक्रिय संलिप्तता को स्पष्ट रूप से प्रमाणित करते हैं।
नशा केवल अपराध नहीं, पूरे समाज के लिए अभिशाप-
• मादक पदार्थों की तस्करी केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि समाज की जड़ों को खोखला करने वाला संगठित अपराध है।
• नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण—
• युवा वर्ग नशे का शिकार होकर अपना भविष्य बर्बाद कर रहा है।
• शिक्षा, रोजगार एवं व्यक्तित्व विकास प्रभावित हो रहा है।
• परिवारों में आर्थिक संकट, कलह एवं टूटन बढ़ रही है।
• नशे की लत पूरी करने के लिए चोरी, लूट, हत्या, मारपीट एवं अन्य गंभीर अपराधों में वृद्धि होती है।
• युवाओं का मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य निरंतर कमजोर होता है।
• अनेक परिवार कर्ज, गरीबी एवं सामाजिक अपमान का सामना करने को विवश हो जाते हैं।
• बच्चों एवं महिलाओं पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
• समाज में भय एवं असुरक्षा का वातावरण उत्पन्न होता है तथा कानून व्यवस्था प्रभावित होती है।
इन्हीं गंभीर परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शासन एवं पुलिस द्वारा मादक पदार्थ तस्करों के *विरुद्ध केवल गिरफ्तारी ही नहीं बल्कि उनकी अवैध सम्पत्तियों की जब्ती एवं PIT-NDPS Act जैसी कठोर निरोधात्मक कार्यवाही* की गई।
