केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने आज नई दिल्ली में देश के शहरी बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की कायापलट करने के उद्देश्य से 'अर्बन चैलेंज फंड' (UCF) के परिचालन दिशानिर्देश और 'ऋण पुनर्भुगतान गारंटी उप-योजना' (CRGSS) का शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य भारतीय शहरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी सहभागिता दर्ज की।
शहर बनेंगे आर्थिक विकास के इंजन
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड केवल एक सरकारी अनुदान नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक निधियों का उपयोग कर बड़े निजी निवेश को आकर्षित करने का एक क्रांतिकारी जरिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य तभी संभव है जब हमारे शहर आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन के सशक्त केंद्र बनें। अमृत, स्वच्छ भारत और स्मार्ट सिटी मिशन की सफलता के बाद अब अगला चरण शहरों को निवेश के लिए तैयार (Investment Ready) बनाने का है।
1 लाख करोड़ की सहायता से 4 लाख करोड़ का निवेश
अर्बन चैलेंज फंड का वित्तीय ढांचा बेहद महत्वाकांक्षी रखा गया है। कुल 1 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के माध्यम से बाजार से लगभग चार गुना निवेश जुटाने का लक्ष्य है। योजना के तहत केंद्र सरकार परियोजना लागत का अधिकतम 25% हिस्सा देगी, जबकि शेष 50% से अधिक राशि नगरपालिका बांड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के जरिए जुटानी होगी। इससे शहरी निकायों में वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा और निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
छोटे शहरों के लिए 'क्रेडिट गारंटी' का कवच
कुल बजट में से 90,000 करोड़ रुपये सीधे परियोजनाओं के लिए, 5,000 करोड़ रुपये क्षमता निर्माण के लिए और शेष 5,000 करोड़ रुपये ऋण पुनर्भुगतान गारंटी (CRGSS) के लिए आवंटित किए गए हैं। यह गारंटी योजना विशेष रूप से द्वितीय और तृतीय श्रेणी के छोटे शहरों, पहाड़ी क्षेत्रों और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए वरदान साबित होगी, जिन्हें अक्सर बाजार से ऋण लेने में कठिनाई होती है। इससे इन शहरों की क्रेडिट रेटिंग सुधरेगी और वे भी आधुनिक विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।
परिवर्तनकारी परियोजनाओं पर ध्यान
इस फंड के जरिए पुराने शहरी क्षेत्रों और बाजारों का पुनर्विकास, शहरी आवागमन (Urban Mobility), अंतिम मील कनेक्टिविटी, जल-स्वच्छता इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु अनुकूल शहरी विकास जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। मंत्रालय के सचिव निवास कटिकिथला ने कहा कि यह कोष बुनियादी ढांचे के निर्माण को वित्तीय स्थिरता के साथ जोड़ता है, जिससे शहरों का शहरीकरण एक निर्णायक और परिणाम-केंद्रित चरण में प्रवेश करेगा।
सहयोग और डिजिटल भविष्य की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच डिजिटल एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही, वित्तीय संस्थानों और शैक्षणिक भागीदारों के साथ आशय पत्रों (LOI) का आदान-प्रदान हुआ। शहरों को बैंकों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से सीधे जोड़ने के लिए एक 'ई-डायरेक्टरी' भी लॉन्च की गई। अर्बन चैलेंज फंड को वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू किया जाएगा, जो भारतीय शहरों के भविष्य की रूपरेखा तय करेगा।
