देवल संवाददाता,लखनऊ। पांच वर्ष पहले आई स्व स्थाने मलिन बस्ती पुनर्विकास नीति पर यदि अमल हो जाता तो विकास नगर स्थित मलिन बस्ती में अग्निकांड जैसा हादसा नहीं होता। विकास नगर मिनी स्टेडियम के पास बुधवार शाम आग लगने से सैकड़ों झुग्गी-झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। उसी जमीन पर झुग्गी वालों के लिए पक्के आवास के तौर पर बहुमंजिला अपार्टमेंट बनना था। इसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वहां झुग्गी-झोपड़ी जैसे कच्चे घरों रहने वाले गरीबों को आवंटित किया जाना था।
प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह योजना कागजों में रह गई और कच्चे घरों में बुने गए सपने बुधवार शाम वर्षों से जुटाई गई गृहस्थी के साथ राख हो गए। स्व स्थाने मलिन बस्ती पुनर्विकास योजना अब किस स्तर पर धूल खा रही है, इसकी जानकारी भी अफसरों के पास नहीं है। जिस जमीन पर झुग्गी बस्ती थी, वह जमीन लोक निर्माण विभाग की थी। करीब पांच वर्ष पहले स्व स्थाने मलिन बस्ती पुनर्विकास योजना के तहत शासन ने यह जमीन सूडा को दे दी जिससे वहां पर बहुमंजिला आवासीय योजना लाई जा सके।
विनायकपुरम दिया गया था नाम
अग्निकांड वाली जगह पर आवासीय योजना के लिए सर्वेक्षण हुआ था। इसे विनायकपुरम नाम भी दिया गया मगर यह कागज से बाहर नहीं आ पाई। योजना की मंशा थी कि जिनको जहां से हटाया जाए, उनको वहीं पर बसा दिया जाए। झुग्गी में रहने वाले लोग सरकारी आवासीय योजनाओं में घर मिलने के बाद भी रोजगार के चक्कर में फिर उसी जगह आकर बस जाते हैं। इसे देखते हुए ही यह योजना तैयार की गई थी।
पीपीपी पर आनी थी यह योजना
जानकारों ने बताया कि यह योजना पीपीपी मॉडल पर आनी थी जिसमें बहुमंजिला भवन में झुग्गी वालों को फ्लैट देने के बाद बिल्डर बाकी फ्लैटों को बेच सकता था। सर्वेक्षण में करीब 300 परिवार को पात्र पाया गया था क्योंकि बहुत से ऐसे भी लोग वहां पर रहते मिले जिन्हें डूडा से सस्ते आवास योजना में मकान मिल चुके थे। इस योजना में प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत मकान दिए जाने थे।
जमीन को कई वर्ष पहले ही लोक निर्माण विभाग से लेकर सूडा को आवासीय योजना के लिए दिया जा चुका है। उसी जमीन पर गरीबों के लिए आवासीय योजना लानी थी।
सत्येंद्र नाथ,
अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
यह पुरानी योजना है जिसके लिए सर्वे भी हुआ था। जमीन को लेकर कुछ विवाद भी सामने आया जिस पर सूडा और शासन को पत्र भी भेजे गए थे। वर्तमान में क्या स्थिति है इसकी जानकारी नहीं है।
चंद्रकांत त्रिपाठी,
परियोजना अधिकारी, डूडा
