देवल संवादाता,वाराणसी। बीएचयू में इस साल की पहली एकेडमिक काउंसिल की बैठक बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की अध्यक्षता में हुई। देर रात तक चली इस बैठक में कोर्स और नियमों को लेकर खूब बहस और तर्क प्रस्तुत किए। आईएमएस बीएचयू के सदस्यों ने तेजी अपने 90 फीसदी प्रस्तावों को पारित करा लिया।
वहीं, क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी को सहमति बन गई है लेकिन आयुर्वेद की ओर से अभी इसे स्वीकार नहीं किया गया है। ऐसे में एलोपेथी में ही क्लीनिकल ट्रायल रिसर्च यूनिट खोला जाएगा। जबकि आयुर्वेद के डीन बाद में चर्चा कर फिर से प्रस्ताव भेजेंगे। दवाओं का क्लीनिकल ट्रायल मानवों पर होगा। वहीं, इंटेसिव मैनेजमेंट केयर विभाग बनाया जाएगा। वहीं कई विभागों के एमडी और डीएम कोर्स में 5-6 सीटें बढ़ाई जाएंगी। मेडिकल में ऑक्यूपेशनल थेरेपी सेंटर खोला जाएगा।
बीएचयू के महामना हॉल में दोपहर तीन बजे से शुरू हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में 21 नए एजेंडे रखे गए। कुलपति ने एक और कुलसचिव ने तीन प्रस्ताव रखे। अपर परीक्षा नियंता प्रो. जीपी सिंह 2025-26 सत्र में पीएचडी प्रवेश के लिए प्रस्ताव रखा। वहीं एनईपी के चेयरपर्सन सेल ने तीन एजेंडा प्रस्तावित किया। वहीं 27 सितंबर 2025 को हुई एकेडमिक काउंसिल के 34 प्रस्तावों को पारित किया गया।
परीक्षा नियंत्रक कार्यालय ने माना नियम विरोधी सुपर न्यूमेरी
भारत अध्ययन केंद्र में न्यूमेरी सीट पर हिंदू अध्ययन में पीएचडी कराने के प्रस्ताव को नहीं माना गया है। इससे एंडजंक्ट फैकल्टी यानी कि दूसरे विभाग के प्रोफेसर को हिंदू अध्ययन से पीएचडी कराने के लिए अलग से सीट नहीं मिलेगी। परीक्षा नियंत्रक कार्यालय के अधिकारियों ने सुपर न्यूमेरी सीट को नियम के विरूद्ध बताया तो कुलपति ने इस प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगाई।
पीएचडी ऑर्डिनेंस में होगा सुधार, वसंता में बीएड कोर्स
एकेडमिक काउंसिल की ओर से फैसला लिया गया है कि पीएचडी ऑर्डिनेंस में सुधार किया जाएगा। खामियों को खत्म किया जाएगा। प्रोग्रेस रिपोर्ट और निकासी को लेकर कई नियम बदले जाएंगे। वसंता राजघाट में चार वर्ष के शिक्षा में बीए और बीएड कोर्स चलेगा। पर्यटन से एमए कोर्स को मंजूरी नहीं मिल पाई। दरअसल इसमें ग्रुप डिस्कसन और पर्सनल इंटरव्यू (जीडीपीआई) हटाने का प्रस्ताव था लेकिन एकेडमिक काउंसिल के अधिकारियों ने इसे भी नियम के खिलाफ बताया।