देवल, ब्यूरो चीफ,ओबरा, सोनभद्र। तहसील परिसर में व्याप्त अव्यवस्थाओं, भ्रष्टाचार और लंबित मामलों को लेकर शुक्रवार को अधिवक्ताओं का आक्रोश फूट पड़ा। ओबरा तहसील परिसर में अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।
अधिवक्ता संघर्ष समिति तहसील ओबरा के बैनर तले दर्जनों अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि इन दिनों तहसील में भ्रष्टाचार चरम पर है। कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबे समय से लंबित पड़ी हैं, जिससे अधिवक्ताओं और वादकारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं ने अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर उपजिलाधिकारी ओबरा के नाम संबोधित ज्ञापन उनके स्टेनो को सौंपा। ज्ञापन में न्यायालय में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने, आरके कार्यालय में परवाना को आर-6 रजिस्टर में दर्ज कर उसे कंप्यूटरीकृत करने तथा इसके लिए निश्चित समय-सीमा तय करने की मांग की गई, ताकि कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था, उप निबंधन कार्यालय ओबरा तथा आपूर्ति कार्यालय को तहसील परिसर में ही स्थापित करने की मांग उठाई। इसके अलावा तहसील परिषद परिसर में निर्मित कैंटीन और फोटोस्टेट दुकानों की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर उन्हें तत्काल संचालित कराने की मांग की गई, जिससे अधिवक्ताओं और वादकारियों को होने वाली असुविधा दूर हो सके। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सात दिन बाद अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। मौके पर एड. उमेश चंद शुक्ला, संजीत चौबे, बी.एन. जायसवाल, सतीश पांडेय, अनिल मिश्रा, कपूर चंद पांडेय, संजय दुबे, सुशील कुमार शर्मा, विमलेश, मनीष मिश्रा, कर्मवीर, अमित उपाध्याय, कौशल पांडेय, अनुज त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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