कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार जहाँ एक ओर 'कायाकल्प योजना' और 'स्वच्छ भारत मिशन' के जरिए परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदलने का दावा कर रही है, वहीं जनपद के आलापुर तहसील अंतर्गत विकास खंड रामनगर की ग्राम पंचायत मकरही में जमीनी हकीकत इसके उलट है। यहाँ प्राथमिक विद्यालय मकरही प्रथम के ठीक बगल में सफाई कर्मचारी की मनमानी के चलते कूड़े का डंपिंग यार्ड बना दिया गया है, जिससे स्कूली बच्चों का दम घुट रहा है।
*दुर्गंध से क्लासरूम बना 'गैस चैंबर', खिड़कियां बंद रखने की मजबूरी*
विद्यालय परिसर के बिल्कुल करीब जमा किए गए कूड़े के ढेर से उठने वाली भयंकर सड़ांध ने स्थिति को नारकीय बना दिया है। दुर्गंध इतनी तीव्र है कि शिक्षकों को मजबूरन क्लासरूम की खिड़कियां हमेशा बंद रखनी पड़ती हैं। बंद कमरों में घंटों बैठने के कारण मासूम बच्चों को घुटन और सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही है। अभिभावकों का आरोप है कि गंदगी के कारण स्कूल में मक्खियों और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे नौनिहालों पर संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
*सफाई कर्मी की मनमानी और मिशन की विफलता*
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि स्वच्छता कार्यक्रम मिशन के तहत तैनात सफाई कर्मी अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय मनमानी पर उतारू है। नियमों के मुताबिक शिक्षण संस्थानों के पास कचरा एकत्र करना वर्जित है, लेकिन यहाँ खुलेआम मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कई बार मौखिक शिकायत के बावजूद सफाई कर्मी कूड़ा हटाने को तैयार नहीं है
हैरानी की बात यह है कि विद्यालय के बगल में इतने बड़े पैमाने पर गंदगी होने के बावजूद इन मासूम बच्चों को इसी दमघोंटू माहौल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा।