पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के चलते गैस आपूर्ति बाधित हो गई है। ऐसे में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए एशिया के कई देश कोयले की ओर रुख कर रहे हैं।
तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गए युद्ध के कारण ईंधन आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट बंद है और कतर ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का उत्पादन बंद कर दिया है, जो वैश्विक बाजार में करीब 20 प्रतिशत एलएनजी की आपूर्ति करता है। इससे पूरे एशिया में ऊर्जा नेटवर्क के लिए खतरा पैदा हो गया है।
80% ईंधन का निर्यात करता है कतर
कतर 80 प्रतिशत से ज्यादा ईंधन का निर्यात एशियाई देशों को करता है, जिनमें जापान, सिंगापुर, थाईलैंड, ताइवान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं। ये देश अपनी एक तिहाई बिजली का उत्पादन प्राकृतिक गैस से करते हैं।
कई देशों में आपूर्ति की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी का सामना कर रहीं कंपनियां कोयला आधारित संयंत्रों की ओर वापस रुख कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट आने वाले महीनों में और भी बढ़ सकता है। कोयले की तुलना में एलएनजी कम प्रदूषणकारी है।
बढ़ा कोयले का उपयोग
बांग्लादेश में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद बिजली कंपनियों ने कोयले का उपयोग बढ़ा दिया है। ताइवान में कोयला आधारित बिजली संयंत्र को फिर से चालू करने की तैयारी है। जबकि दक्षिण कोरिया में भी एलएनजी आपूर्ति में उतार-चढ़ाव के मद्देनजर परमाणु और कोयला आधारित संयंत्रों को बढ़ावा देने की तैयारी चल रही है।