आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बुधवार के सत्र में मछलीशहर की सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने ऊर्जा मंत्री से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अंत्योदय कार्डधारकों, विधवा महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को बिजली बिल में राहत दिए जाने को लेकर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने सदन में सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए गरीब तबके को राहत देने की मांग की।
डॉ. सोनकर ने कहा कि प्रदेश में लगभग 40 लाख अंत्योदय कार्डधारक ऐसे हैं जो अत्यंत गरीब स्थिति में जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन उनके लिए कोई विशेष बिजली योजना लागू नहीं की गई है। उन्होंने सदन को बताया कि 300 यूनिट बिजली का वार्षिक बिल करीब 20,800 रुपये तक पहुंच जाता है, जो इन परिवारों के लिए अत्यधिक बोझ है।
विधायक ने कहा कि विधवा महिलाओं को सरकार द्वारा मात्र 1,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाती है, जबकि बिजली बिल के रूप में उनसे लगभग 1,740 रुपये की वसूली की जाती है। इसी तरह लगभग दस लाख दिव्यांग और वृद्धजन भी पेंशन के नाम पर 1,000 रुपये प्राप्त करते हैं, लेकिन बिजली बिल के रूप में उनसे अधिक राशि ली जा रही है। उन्होंने इसे गरीबों के साथ अन्याय करार दिया।
सदन में तीखा तंज कसते हुए डॉ. सोनकर ने कहा कि मंत्री सदन में पुरानी सरकारों पर आरोप लगाते हैं, जबकि क्षेत्र में जाकर धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख कर अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को कथाओं और भाषणों के बजाय जमीनी स्तर पर गरीब परिवारों की समस्याओं को समझना चाहिए।
उन्होंने मांग रखी कि अंत्योदय कार्डधारकों, विधवाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगों को कम से कम 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाए। साथ ही वर्तमान में अंत्योदय कार्डधारकों को दी जा रही सब्सिडी (करीब 3.50 रुपये प्रति यूनिट) को बढ़ाकर पूर्ण छूट दी जाए, ताकि गरीब परिवारों को वास्तविक राहत मिल सके।
विधायक ने यह भी कहा कि सरकार का दावा है कि छह करोड़ परिवार गरीबी रेखा से ऊपर आ चुके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में परिवार अब भी राशन और पेंशन पर निर्भर हैं तथा बिजली बिल चुकाने में असमर्थ हैं।
अंत में डॉ. रागिनी सोनकर ने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने और शीघ्र ठोस कार्रवाई करने की मांग की, ताकि प्रदेश के गरीब, विधवा, वृद्ध और दिव्यांग नागरिकों को बिजली बिल के बोझ से राहत मिल सके।