देवल, ब्यूरो चीफ,डाला, सोनभद्र। ओबरा तहसील के बिल्ली-मारकुंडी व डाला क्षेत्र के निवासी इन दिनों गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहे हैं। इलाके में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों, भारी वाहनों की आवाजाही और धूल के गुबार ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों का अब घर से बाहर निकलना तक दूभर हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बिल्ली-मारकुंडी व डाला खनन क्षेत्र में स्थापित दर्जनों कशर प्लांटों के संचालन से उड़ रही धूल, पूरे क्षेत्र को अपने आगोश में ले लिया है। सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं कराए जाने से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। सुबह-शाम हवा में घुला प्रदूषण लोगों की सांसों पर सीधा हमला कर रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में सांस संबंधी रोग, खांसी, दमा, आंखों में जलन और त्वचा रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। कई परिवारों को इलाज के लिए बाहर के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई विशेष शिविर या जांच अभियान नहीं चलाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद जिला प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की। सवाल उठ रहा है कि जब लोगों की सेहत दांव पर है तो जिम्मेदार विभाग आखिर मौन क्यों हैं ?, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को
बाध्य होंगे। उधर लगाए जा रहे आरोपों के बावत क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी को फोन कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने काल रीसिव नहीं किया। लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
