देवल संवाददाता, बलिया। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने बलिया में स्मार्ट मीटर और बिजली बिलों की विसंगतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कैंप कार्यालय सीताराम चौराहा, आर्य समाज रोड पर आयोजित किया गया। इस दौरान व्यापारियों ने विभाग की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर पुराने डिजिटल मीटरों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत अधिक तेजी से चलते हैं। कई मामलों में घर या दुकान का लोड समान रहने के बावजूद बिजली का बिल अचानक दोगुना हो गया है, जिससे उपभोक्ता परेशान हैं।
व्यापारियों ने तकनीकी खराबी के कारण स्मार्ट मीटर की रीडिंग में अचानक 'जंप' होने की शिकायत की। उनके अनुसार, बिना किसी भारी उपकरण के चले भी मीटर हजारों यूनिट की खपत दिखा देता है, जिसे विभाग 'तकनीकी त्रुटि' कहकर टाल देता है, लेकिन उपभोक्ता को भारी बिल भरना पड़ता है।
एक अन्य प्रमुख विसंगति यह है कि स्मार्ट मीटर 'प्रीपेड' मोड की तरह काम करते हैं। बैलेंस खत्म होते ही बिना किसी चेतावनी या मानवीय हस्तक्षेप के सॉफ्टवेयर के जरिए रात में या छुट्टी के दिन भी बिजली काट दी जाती है। पैसा जमा करने के बाद भी विभाग के सर्वर में अपडेट होने में देरी के कारण घंटों या दिनों तक बिजली नहीं आती। इंटरनेट न होने पर डेटा गलत अपलोड होने की समस्या भी सामने आती है।
व्यापारियों ने सॉफ्टवेयर में पारदर्शिता के अभाव पर भी सवाल उठाए। आम आदमी को यह समझ नहीं आता कि स्मार्ट मीटर किस दर से और किस तरह से पैसे काट रहा है। पुराने मीटरों में उपभोक्ता खुद यूनिट देख सकते थे, लेकिन स्मार्ट मीटर का डेटा सीधे विभाग के कंट्रोल रूम जाता है, जिससे मनमानी बिलिंग की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा, स्मार्ट मीटर लगने के बाद विभिन्न प्रकार के सेवा शुल्क और फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ाकर लगाए जा रहे हैं, जिसकी स्पष्ट जानकारी उपभोक्ता को नहीं दी जाती।
वरिष्ठ प्रांतीय मंत्री सुनील 'परख' ने कहा कि विभाग को स्मार्ट मीटर की अपनी नीतियों पर पुनर्विचार कर उपभोक्ताओं को राहत देनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो प्रदेश संगठन के नेतृत्व में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अध्यक्ष राधा रमण अग्रवाल ने कहा कि बिजली विभाग जबरन स्मार्ट मीटर थोपकर उपभोक्ताओं का उत्पीड़न कर रहा है।