साल 2026 अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए बुरी खबर लेकर आया। सोमवार, 12 जनवरी को इस साल के पहले स्पेस मिशन को बड़ी नाकामी मिली।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO द्वारा लॉन्च किया गया PSLV-C62 रॉकेट एक बड़ी टेक्निकल खराबी के चलते फेल हो गया। इससे पहले मई 2025 में भी PSLV-C61 को भी ऐसी ही नाकामी मिली थी।
अब सवाल यह है कि आखिर एक के बाद एक क्यों फेल हो रहे भारत के अंतरिक्ष मिशन? तकनिकी समस्या को लेकर समझते हैं पूरी कहानी।
अंतिम समय पर आई खराबी
श्रीहरिकोटा से सुबह 10:18 बजे PSLV की स्मूथ लॉन्च हुई। इसके बाद ये घटनाएं घटी।
श्रीहरिकोटा से रॉकेट का सुबह 10:18 बजे स्मूथ और सफल लॉन्च हुआ।
लॉन्च के ठीक 8 मिनट बाद रॉकेट के तीसरे स्टेज में परफॉर्मेंस में गड़बड़ी आई।
इस खराबी के कारण रॉकेट अपने तय रास्ते (निर्धारित कक्षा) से भटक गया।
इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने क्या कहा?
इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने फ्लाइट के बाद एक अपडेट में बताया, 'मिशन में एक टेक्निकल गड़बड़ी हुई है। शुरुआती फ्लाइट स्टेज तो ठीक थे, लेकिन तीसरे स्टेज (PS3) में चैंबर प्रेशर में अचानक गिरावट के कारण जरूरी थ्रस्ट नहीं मिल पाया।
हमने तय फ्लाइट पाथ से काफी बड़ा भटकाव देखा है। इसके चलते सैटेलाइट्स को ऑर्बिट में नहीं पहुंचाया जा सका।'
फेलियर एनालिसिस कमेटी अब सभी टेलीमेट्री डेटा की जांच करेगी और मूल कारण का पता लगाने के लिए इसी तरह के लोड की स्थितियों में फ्लेक्स नोजल की भी जांच करेगी।
अन्वेषा और 15 दूसरे सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में गायब
इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा, 'मुख्य पेलोड, DRDO का स्ट्रेटेजिक सर्विलांस सैटेलाइट अन्वेषा, और 15 दूसरे सैटेलाइट्स के अब खो जाने का डर है, जो PSLV के तीसरे स्टेज के लिए लगातार दूसरी नाकामी है।
टेलीमेट्री स्क्रीन पर रास्ते से भटकने का सिग्नल मिलने लगा। रॉकेट अचानक रोल करने लगा, एक लट्टू की तरह अपनी धुरी पर घूमने लगा, जैसे उसका बैलेंस बिगड़ गया हो।
अंतरिक्ष के खतरनाक वैक्यूम में, 8,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से थोड़ी सी भी गड़बड़ मिशन को कंट्रोल से बाहर करने के लिए काफी होती है। अपने कार्गो को ऑर्बिट में पहुंचाने के बजाय, यान अपने तय रास्ते से भटकने लगा।'
लगातार दूसरा मिशन फेल
PSLV-C62 से पहले PSLV-C61 मिशन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। पिछले साल मई में PSLV-C61 को लॉन्च किया गया था। स्मूथ लॉन्चिंग के बाद PSLV-C61 भी तीसरे स्टेज पर आकर अपने रास्ते से भटक गया था।
ISRO के बयान में तब कहा गया था कि राकेट का तीसरे स्टेज में ऑब्जर्वेशन हुआ। जिसके बाद चैंबर के प्रेशर में लगातार गिरावट आई, इस गिरावट की वजह से थ्रस्ट कम हुआ और सैटेलाइट अपने ऑर्बिट में नहीं पहुंच पाई।