कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।देश के अन्नदाता किसानों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। सड़क निर्माण के दौरान जब किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाती है, तो उन्हें मुआवजा तो मिलता है, लेकिन अक्सर यह मुआवजा उनके भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं होता। कई किसान इस मुआवजे का उपयोग दूसरी जमीन खरीदने के बजाय अपने दैनिक खर्चों में कर देते हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेने को मजबूर होते हैं, लेकिन उच्च ब्याज दरों और खराब फसल के कारण वे इस लोन को चुकाने में अससमर्थ हो जाते हैं। पहले सिंचाई विभाग द्वारा किसानों की खेतों की सिंचाई की जाती थी, लेकिन अब नहरों के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था की जाती है, जिससे कई क्षेत्रों में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
किसानों को खाद और बीज प्राप्त करने के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता है, जिससे उनका समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद होते हैं। यह आवश्यक है कि खाद और बीज बिना लाइन के हर किसान को उपलब्ध कराए जाएं।
किसान दिन-रात मेहनत करके अनाज उगाते हैं, जिसे अमीर और गरीब सभी खाते हैं। इसलिए, यह आवश्यक है कि अमीर और गरीब दोनों किसान का साथ दें और उनकी समस्याओं का समाधान करने में मदद करें।
*समाधान की मांग:*
1. सड़क निर्माण के दौरान अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए और किसानों को दूसरी जमीन खरीदने में मदद की जाए।
2. किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन की ब्याज दरें कम की जाएं और लोन चुकाने के लिए अधिक समय दिया जाए।
3. सिंचाई की व्यवस्था में सुधार किया जाए और नहरों के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
4. खाद और बीज बिना लाइन के हर किसान को उपलब्ध कराए जाएं।
5. अमीर और गरीब दोनों किसान का साथ दें और उनकी समस्याओं का समाधान करने में मदद करें।
यह खबर किसानों की समस्याओं को उठाने और उनके समाधान की मांग करने के लिए एक प्रयास है। हमें उम्मीद है कि सरकार और समाज इस ओर ध्यान देंगे और किसानों की समस्याओं का समाधान करने में मदद करेंगे।