ईरान में बढ़ते तनाव पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है। अमेरिका के ईरान पर हमले के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, ईरान में बिगड़ते हालात पूरे मिडिल ईस्ट के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। वहीं, ईरान के पूर्व राजनयिक और परमाणु वार्ताकार ने भी इसे लेकर चेतावनी दी है।
ईरान की परमाणु वार्ता में अहम भूमिका निभाने वाले हुसैन मौसावियन के अनुसार, अगर ईरान में सैन्य कार्रवाई हुई तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ेगा। ऐसे में बातचीत ही इस समस्या का एकमात्र हल है। तेहरान और वाशिंगटन को साथ बैठकर बातचीत से मसले का हल निकालना चाहिए।
अमेरिका का हमला टला
हुसैन मौसावियन का कहना है, "ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमले की संभावना काफी कम हो गई है। ईरान ने हिरासत में लिए गए लोगों को फांसी देने का फैसला टाल दिया है, जिससे अमेरिका को हमला करने का मौका नहीं मिलेगा।"
हुसैन के अनुसार, "ईरान में तख्तापलट की अमेरिका की कोशिश नाकाम साबित हुई है। इसे सफल बनाने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए गए। अमेरिका, ईरान को अशांति, अस्थिरता और गृहयुद्ध की स्थिति में धकेलना चाहता था। इसके लिए उसने पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन उसका दांव विफल साबित हुआ।"
कैसे होगी शांति?
हुसैन ने आगे कहा, "अमेरिका के साथ तनाव ईरान के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है। इससे आसपास के देशों पर भी खतरा बना हुआ है। शांति का एकमात्र रास्ता कूटनीति है।"
ईरान में 20 दिन से प्रदर्शन जारी
बता दें कि 28 दिसंबर को ईरान की राजधानी तेहरान के ग्रैंड बाजार में प्रदर्शन शुरू हुए थे। कुछ ही दिन में ये प्रदर्शन पूरे देश में आग की तरह फैल गए। भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार ने इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय सेवाएं पूरी तरह से रोक दी। हिंसक प्रदर्शन के दौरान ईरान में अब तक 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।