डोनल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने मंसूबों के कारण अमेरिका और यूरोप के सदियों पुराने रिश्ते में खटास आने लगी है। कई यूरोपीय देशों ने ट्रंप के प्लान को सिरे से खारिज कर दिया है। इसी बीच नाटो (NATO) के प्रमुख मार्क रूट्टे ने बड़ा बयान दिया है।
मार्क रूट्टे का कहना है कि अमेरिकी सेना की सहायता के बिना यूरोप अपनी रक्षा नहीं कर सकता है। इसके लिए पूरे यूरोप को अपना रक्षा बजट दोगुना करना होगा।
नाटो प्रमुख ने क्या कहा?
मार्क रूट्टे के अनुसार, "अगर यहां किसी को लगता है कि यूरोपीयन यूनियन या पूरा यूरोप मिलकर बिना अमेरिका की मदद के खुद की सुरक्षा कर सकता है, तो आप सपनों की दुनिया में हैं। आप ये नहीं कर सकते हैं। यूरोप और अमेरिका, दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है।"
जुलाई 2025 में हेग में नाटो का सम्मेलन हुआ था, जिसमें सभी देशों ने अपनी जीडीपी का 3.5 प्रतिशत हिस्सा रक्षा पर खर्च करने का संकल्प लिया था। वहीं, 2035 तक इसे बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
दोगुना पैसा खर्च करना होगा: मार्क
मार्क रूट्टे का कहना है कि जीडीपी का 5 प्रतिशत हिस्सा खर्च करने के बाद भी यूरोप किसी भी कीमत पर अमेरिका की बराबरी नहीं कर सकता है। इसके लिए 10 प्रतिशत हिस्सा खर्च करना होगा। यूरोप को परमाणु संपन्न बनना होगा, जिसके लिए यूरोप को अरबों यूरो खर्च करने पड़ेंगे।
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकी
बता दें कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की ट्रंप की धमकी के बाद से ही नाटो में तनाव की स्थिति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड प्लान का समर्थन न करने वाले यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है।
ग्रीनलैंड नाटो देश डेनमार्क का हिस्सा है। अमेरिका भी नाटो का अहम सदस्य है। नाटो में कुल 32 देश शामिल हैं। नाटो के अनुच्छेद 5 के तहत किसी भी देश पर हमला सभी नाटो देशों पर हमला करने के बराबर है। ऐसे में ट्रंप का ग्रीनलैंड प्लान नाटो में विवाद की वजह बन गया है।