देवल संवादाता,वाराणसी। काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में बुलडोजर चलता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसे कॉरिडोर विकास के नाम पर मंदिर तोड़े जाने से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है। यह आठ सेकेंड का वीडियो अकांक्षा सिंह रघुवंशी के सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया, जिसमें आवाज सुनाई दे रही है कि विकास के नाम पर विनाश, देखिए कैसे मंदिर गिराए जा रहे हैं।
वीडियो के वायरल होते ही राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। मंगलवार दोपहर तक पाल समाज समिति के महेंद्र पाल कार्यकर्ता के साथ मौके पर पहुंचे। यहां स्थानीय नागरिक मौके पर विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि विकास के नाम पर मणिकर्णिका घाट के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है। धरोहर को खत्म किया जा रहा है, जिससे काशी की प्राचीन परंपरा और ऐतिहासिक पहचान को नुकसान पहुंच रहा है।
वहीं प्रशासन ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जिला प्रशासन का दावा है कि मणिकर्णिका घाट पर किसी भी मंदिर को नहीं तोड़ा गया है। यहां अत्याधुनिक शवदाह गृह का निर्माण एक अलग एजेंसी द्वारा किया जा रहा है और घाट पर स्थित सभी मंदिरों का सुंदरीकरण प्रस्तावित है न कि ध्वस्तीकरण।
अधिकारियों के अनुसार पुनर्विकास योजना के तहत घाट पर दो सामुदायिक शौचालय, हरित क्षेत्र, 32 शवदाह प्लेटफॉर्म, प्रदूषण रहित चिमनी, पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण स्थल और प्रतीक्षा कक्ष बनाए जा रहे हैं। पूरे प्रोजेक्ट में भूतल और प्रथम तल को मिलाकर बड़े पैमाने पर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर व्यवस्था मिल सके। मौके पर एडीएम सिटी आलोक वर्मा, एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी थाने के फोर्स के साथ पहुंच कर लोगों को समझाया और धरना प्रदर्शन समाप्त कराया।