देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। मत्स्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। जुगैल थाना क्षेत्र के अगोरी गांव में रामदेव पुत्र मुन्ना के नाम से वर्ष 2023-24 में स्वीकृत आरएस सिस्टम से मछली पालन केन्द्र का निर्माण कार्य अधूरा होने के बावजूद पूर्ण भुगतान किए जाने का मामला इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है। आरोप है कि इस योजना के तहत प्रस्तावित निर्माण कार्य केवल ढांचे तक ही सिमट कर रह गया है, बावजूद इसके विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से अधूरे कार्य को पूर्ण दर्शाते हुए करीब 15 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार उक्त योजना की कुल लागत 25 लाख रुपए थी, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत अनुदान राशि शामिल है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्य स्थल पर आवश्यक संरचनाएं, तकनीकी मानक के वितरित कराए गए निर्माण कार्य आज भी अधूरा पड़ा है। फिर भी विभागीय डीडी एवं निरीक्षक द्वारा कार्य पूर्ण दिखाकर तीन किश्तों में भुगतान करा दिया गया। डाला निवासी अर्जुन सिंह ने इस संबंध में मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के उत्तर में विभाग द्वारा कहा गया कि विभागीय जांच एवं जियो टैगिंग फोटो उपलब्ध होने के बाद 15 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। यदि कार्य अधूरा पड़ा है तो लाभार्थी को कार्य पूर्ण कराए जाने के लिए निर्देशित किया जाएगा। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह उत्तर नियमों के सर्वथा विपरीत है। नियमों के अनुसार, यदि कार्य अपूर्ण होने के बावजूद भुगतान किया गया है तो जिम्मेदार जांच अधिकारी एवं संबंधित
कर्मचारियों पर कार्रवाई के साथ ही सरकारी धन की वसूली का स्पष्ट प्रावधान है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पूरे प्रकरण को बिचौलियों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब इस मामले को शपथ पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी सोनभद्र को अवगत कराया जाएगा। यदि इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे। यह मामला सामने आने के बाद मत्स्य विभाग की पारदर्शिता, जियो टैगिंग की विश्वसनीयता और जांच प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शासन स्तर पर इस कथित घोटाले पर क्या कार्रवाई की जाती है।
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