देवल, ब्यूरो चीफ,नारायनपुर,मिर्जापुर। जिले के निजी अस्पताल अब 'मंदिर' नहीं, 'लूट के अड्डे' बन चुके हैं। सरकारी नियमों और संवैधानिक अधिकारों को ताक पर रखकर मरीजों की जेब काटने का खेल खुलेआम जारी है। *जहां डॉक्टर देवता नहीं, व्यापारी बने बैठें हैं,* वहां गरीब जनता क्या उम्मीद लगाए? स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की लापरवाही इस कदर बढ़ गई है कि निजी अस्पतालों के संचालक प्रशासन को चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
*स्वास्तिक अस्पताल बना लूटखाना?*
नारायनपुर क्षेत्र सिकरा बरईपुर में चल रहे नर्सिंग होम, ट्रामा सेंटर और प्राइवेट अस्पतालों ने मरीजों से वसूली के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ताजा मामला *स्वास्तिक हॉस्पिटल्स* का है। पथरी का आपरेशन के नाम पर महिला मरीज को भर्ती किया गया। परिजनों से 25,000 रुपये लेने की बात तय हुई थी। इसके बाद ईलाज के बाद मनमाना तरीके से पैसे ऐठना चालू कर दिया। हॉस्पिटल में ईलाज होने के बाद मरीज महिला अपने घर चली गई। इसके 16 दिन के बाद जब मरीज महिला को पेट में दर्द होने लगा तो वो फिर हॉस्पिटल आई, जहां एक्सरे में पता चला कि एक पाइप लगाया गया है, जो मरीज महिला हो पता तक नहीं था। ना ही उनके परिजनों को पता था।
परिजनों ने जब विरोध किया, तो अस्पताल प्रबंधन ने यह कहकर दबाव बनाया कि *7000 पैसे और लाओ तब हम पाइप को निकालेंगे, नहीं तो मरीज ले जाओ।* यह स्थिति उन गरीब परिवारों के लिए किसी भूकंप से कम नहीं, जो इलाज के लिए अपना सबकुछ गिरवी रख देते हैं।महिला व उनके परिजनों ने लगाई न्याय की गुहार। निजी हॉस्पिटलों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित परिवार ने अस्पताल संचालक पर लगाए गंभीर आरोप। पैसे के अभाव में मरीज हो रहा हलकान लगाई न्याय व सुरक्षा की गुहार।
बल्कि सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार से हॉस्पिटल के व्यवस्थापक और आयोजक के द्वारा प्रशासन की मिलीभगत से कानून व्यवस्था का चीरहरण का मजाक भी बनाया जा रहा है। और मिडिया व विभाग को अपनी जेब मे रखने की बात कही गयी। स्वास्तिक हॉस्पिटल के दबंग डाक्टरों ना तो शासन का डर है ना प्रशासन की, यहा चलता है खुनी खेल।