देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि एवं सम्बन्धित गतिविधियों से जुड़ी हुई है। परन्तु धान-गेहूं जैसी परंपरागत खेती पर निर्भरता होने के कारण किसानों की आमदनी ज्यादा नहीं हो पाती है। किसानों की आय बढ़ाने एवं युवाओं को रोजगारपरक बनाने के लिए के लिए खेती में विविधीकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है l उक्त जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के प्रभारी अधिकारी प्रोफेसर डी.के. सिंह ने दी l केंद्र के वरिष्ठ फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मा० प्रधानमंत्री जी द्वारा चलाई गई विकसित भारत संकल्प यात्रा का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेl पूर्वांचल में जनसँख्या घनत्व अधिक होने एवं किसानों की जोत अत्यंत कम होने के कारण खेती को अत्यंत कम महत्व दिया जाता हैl आजीविका हेतु अधिकतर युवाओं का पलायन दूसरे शहरों, राज्यों अथवा विदेशों में होता है l परन्तु पिछले 5-6 वर्षों से या यूँ कहें कि कोविड-19 के बाद से बाहर रह रहे युवाओं में आत्मनिर्भर बनने और गाँव में ही स्व रोजगार शुरू करने की होड़ लगी है l वरिष्ठ मृदा वैज्ञानिक डॉ रणधीर नायक ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र, कोटवा द्वारा उन्नत तकनीकी के हस्तांतरण एवं सरकार द्वारा किसान हित में चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभान्वित करने का प्रयास किया जा रहा है l बीज उत्पादन एवं विधायन, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, सूकर पालन, जैविक कम्पोस्ट उत्पादन, सब्जी और फूलों की बेमौसमी खेती, सब्जी व फूलों का नर्सरी उत्पादन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, सब्जियों एवं फलों का मूल्य संवर्धन आदि क्षेत्रों में युवा बेहतर कार्य कर रहे है l उद्यान वैज्ञानिक डॉ विजय कुमार विमल ने बताया कि पॉलीहाउस में फूलों की बेमौसमी खेती किसान भाइयों और युवा बेरोजगारों को मुनाफा दे सकती है l पॉलीहाउस में जरबेरा फूलों की संरक्षित खेती करके अच्छी कमाई की जा सकती हैl जरबेरा फूलों की बाजार में हमेशा मांग बनी रहती हैl जरबेरा एक विदेशी और सजावटी फूल है जो पूरी दुनिया में उगाया जाता है | इसे 'अफ्रीकन डेजी' या 'ट्रांसवाल डेजी' के नाम से जाना जाता है। इस फूल की उत्पत्ति अफ्रीका और एशिया महादेश से हुई है जिसका उत्पादन सालभर किया जा सकता है। व्यावसायिक दृष्टि से अच्छी आय दे सकता हैl जरबेरा लम्बे डंठल में पंखुड़ियों वाला बेहद मनमोहक फूल होता हैl यह लाल, सफ़ेद, पीले, नारंगी आदि रंगों में पाया जाता हैl इसका फूल फूलदान में कई दिनों तक तरोताज़ा बना रहता हैl गुलदस्ते और स्टेज की सजावट में यह फूल काफी उपयोगी होता हैl जनपद के पल्हना विकास खंड के चिलबिला ग्राम के युवा उद्यमी अभिनव सिंह पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं l श्री सिंह इस उद्यम से पूर्व इंग्लैंड में माइक्रोसॉफ़्ट कंपनी में बतौर ऐज़ ए सीनियर सॉफ्टवेर कंसलटेंट के रूप में कार्यरत थे । नौकरी छोड़ कर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की प्रेरणा से श्री अभिनव ने सन् 2019 में पालीहाउस में जरबेरा फूल की संरक्षित खेती की शुरुआत की। एक अच्छी नौकरी छोड़ कर फूल की खेती में उद्यमिता स्थापना तथा वर्ष 2020 में जरबेरा फूल की व्यावसायिक तुड़ाई की l इस उद्यम में श्री सिंह का अभी तक का कुल लाभ रू० 30-32 लाख रहा l कृषि आधारित उद्यम की स्थापना से न केवल उन्हें बेहतर आय प्राप्त हो रही है बल्कि प्रत्यक्ष रूप से 20 परिवारों को और अप्रत्यक्ष रूप से 40 लोगों को रोज़गार भी मिल रहा है । कोरोना काल में गाँव लौटे हुए मज़दूर भी उनके पॉलीहाउस में कार्य करते हैं । ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पलायन रोकने के लिये कृषि उद्यमिता अपनाना अत्यंत आवश्यक है |



