लोकसभा में गुरुवार को केंद्र और विपक्ष के बीच महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए, जिससे संसद के विशेष सत्र का माहौल गरम हो गया। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और अमित शाह ने लोकसभा में तीन विधेयक पेश करने का प्रस्ताव रखा, जिसका विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध किया। विपक्ष ने इन प्रस्तावों को संविधान विरोधी बताया।
संविधान का 131वां संशोधन विधेयक, 2026 पर लोकसभा में मत विभाजन हुआ, जिसमें 207 सांसदों ने समर्थन किया जबकि 126 सांसदों ने विरोध में वोट डाले। 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले इस सत्र का मुख्य फोकस 2029 लोकसभा चुनाव से पहले विधानसभाओं और संसद में महिलाओं का आरक्षण लागू करना तथा संसदीय क्षेत्रों का व्यापक पुनर्गठन करना है।
तीनों बिलों में क्या प्रस्ताव हैं?
महिला आरक्षण 2026: 'संविधान का 131वां संशोधन बिल 2026 का मकसद 2011 की जनगणना के आधार पर, 2029 के चुनावों से लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना है। इस बिल में आरक्षण को समायोजित करने के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव भी है।
परिसीमन बिल 2026: जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करने का प्रावधान है। इससे राज्यों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का स्वरूप प्रभावी ढंग से बदल जाएगा। इस प्रावधान का विपक्ष ने ज़ोरदार विरोध किया है, क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता है कि इसका संघीय संतुलन पर क्या असर पड़ेगा।
केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल 2026: गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया 'केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026' का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेशों में चुनावी और प्रशासनिक प्रावधानों को प्रस्तावित आरक्षण और परिसीमन के ढांचे के अनुरूप बनाना है।
पक्ष और विपक्ष ने क्या कहा?
किरेन रिजिजू (भाजपा): केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बहस के लिए समय-सीमा तय की। उन्होंने बताया कि यह चर्चा काफी विस्तृत होगी और जरूरत पड़ने पर समय को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। चर्चा 12 घंटे तक चलेगी। स्पीकर के पास चर्चा का समय बढ़ाने का अधिकार होना चाहिए। बिलों पर वोटिंग कल होगी।
उन्होंने आगे बताया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित किया गया था, जिसमें 2026 के बाद की जनगणना और परिसीमन के आधार पर इसके प्रावधानों को लागू करने का प्रावधान है। लोकसभा सदस्यों की संख्या में समान, 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी, और इससे सीटों की संख्या बढ़कर 815 हो जाएगी, जिनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो सदन की कुल संख्या का एक-तिहाई है। किसी को भी राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा, और वे अपनी मौजूदा संख्या बनाए रखेंगे।
गौरव गोगोई (कांग्रेस): कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर उसके कार्यान्वयन में देरी करने के लिए बाधाएं पैदा कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या के आधार पर कोटे को तुरंत लागू किया जा सकता है, और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस विधेयक का इस्तेमाल परिसीमन के लिए एक बैकडोर के तौर पर कर रही है।
आप बार-बार महिला आरक्षण में रुकावटें डाल रहे हैं। अगर आपने 2023 में हमारी बात सुनी होती, तो 2024 में महिला आरक्षण लागू हो गया होता। महिला आरक्षण को लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 543 पर लागू किया जाना चाहिए, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। यह विधेयक महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि पिछले दरवाजे से परिसीमन के लिए है।
