अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ ईरान के खिलाफ जंग शुरू करने से पहले ये नहीं सोचा होगा कि ये युद्ध इतना लंबा चलेगा। 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष को लगभग एक महीना होने जा रहा है। अब ट्रंप एक ऐसे संकट का सामना कर रहे हैं जो उनके हाथों से निकलता दिख रहा है।
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि विश्व में ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं, अमेरिका अपने सहयोगी देशों से अलग-थलग पड़ गया और तो और ट्रंप ने कहा था कि यह एक छोटा अभियान होगा लेकिन इसके बावजूद अभी और सैनिक तैनात करने की तैयारी चल रही है।
नाटो देशों को ट्रंप ने कहा- कायर
अपना बचाव में ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने में मदद करने से इनकार करने के लिए अन्य NATO देशों को "कायर" कहा और जोर देकर कहा कि यह अभियान योजना के अनुसार ही आगे बढ़ रहा है।
शुक्रवार को उन्होंने बयान दिया कि यह लड़ाई "सैन्य रूप से जीत ली गई है।" लेकिन ईरान जिस तरह से हमलों का जवाब दे रहा है, खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस की आपूर्ति को बाधित कर रहा है और साथ ही पूरे क्षेत्र में मिसाइल अटैक भी कर रहा है, यह बयान असलियत से मेल नहीं खाता।
राजनीतिक भविष्य को लेकर संकट
अब ऐसा लगता है कि जिस संघर्ष को शुरू करने में उन्होंने मदद की थी, उसके न तो नतीजों पर और न ही उसके संदेश पर उनका कोई नियंत्रण है। बाहर निकलने की कोई स्पष्ट रणनीति न होने से उनकी राष्ट्रपति के तौर पर विरासत और उनकी पार्टी के राजनीतिक भविष्य, दोनों के लिए जोखिम पैदा हो गया है। खासकर तब, जब रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस में अपनी मामूली बहुमत वाली सीटों को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही प्रशासनों के लिए मिडिल-ईस्ट के पूर्व वार्ताकार रहे एरॉन डेविड मिलर ने कहा, "ट्रंप ने अपने लिए 'ईरान युद्ध' नाम का एक ऐसा जाल बुन लिया है, जिससे उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि बाहर कैसे निकला जाए? यही उनकी हताशा का सबसे बड़ा कारण है।"
ट्रंप की सत्ता की सीमा
पिछले एक हफ्ते के दौरान कूटनीतिक, सैन्य और राजनीतिक रूप से ट्रंप की सत्ता की सीमाएं पूरी तरह से स्पष्ट होकर सामने आ गईं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को नाम न बताने की शर्त पर कहा, सहयोगी NATO सदस्यों और अन्य विदेशी साझेदारों द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने में मदद के लिए अपनी नौसेनाएं तैनात करने के प्रस्ताव का विरोध किए जाने से वह (अधिकारी) अचंभित रह गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति यह नहीं चाहते कि वे अलग-थलग पड़ते हुए दिखें, इसलिए व्हाइट हाउस के कुछ सहयोगियों ने ट्रंप को सलाह दी है कि वे जल्द से जल्द कोई निकलने का रास्ता तलाशें और सैन्य अभियान के दायरे को सीमित करें।
इजरायल के साथ भी मतभेद आए सामने
इसके साथ ही इजरायल के साथ भी मतभेद सामने आने लगे हैं। जहां एक ओर ट्रंप का जोर देकर कहना है कि ईरान के 'साउथ पार्स' गैस क्षेत्र पर इजरायल के हमले के बारे में उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं थी, वहीं दूसरी ओर इजरायली अधिकारियों का कहना है कि यह हमला वास्तव में अमेरिका के साथ समन्वय करके ही किया गया था।
दोराहे पर खड़े नजर आते ट्रंप
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप अब 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में एक ऐसे दोराहे पर खड़े हैं, जहां यह साफ नहीं है कि वे कौन-सा रास्ता चुनेंगे। वह पूरी ताकत झोंककर अमेरिका के हमले को और तेज कर सकते हैं।
शायद ईरान के खार्ग द्वीप पर स्थित तेल केंद्र पर कब्जा भी कर लें या मिसाइल लॉन्चरों की तलाश में ईरान के तट पर अपनी सेना तैनात कर दें। लेकिन ऐसा करने से एक लंबे समय तक चलने वाली सैन्य प्रतिबद्धता का जोखिम पैदा हो जाएगा, जिसका अमेरिकी जनता बड़े पैमाने पर विरोध करेगी।
या फिर, चूंकि दोनों ही पक्ष अभी बातचीत से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में ट्रंप अपनी जीत का ऐलान करके पीछे हट सकते हैं। ऐसा करने से खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देश उनसे नाराज हो सकते हैं, क्योंकि उनके सामने एक घायल और दुश्म ईरान रह जाएगा। एक ऐसा ईरान जो अभी भी एक साधारण परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकता है और खाड़ी क्षेत्र में जहाजरानी पर अपना नियंत्रण बनाए रख सकता है।
इस युद्ध ने यह भी दिखाया है कि जिस MAGA आंदोलन पर ट्रंप कभी मजबूत पकड़ रखते थे, वह अब कमजोर पड़ रही है। कई जाने-माने प्रभावशाली लोग इस संघर्ष के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। हालांकि, अब तक ज्यादातर समर्थक उनके साथ ही खड़े रहे हैं, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अगर गैस की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं और अमेरिकी सैनिकों को तैनात किया गया तो आने वाले हफ्तों में ट्रंप का नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है।
जैसे-जैसे यह संघर्ष लंबा खिंचता गया है, इस बात के संकेत बढ़ते जा रहे हैं कि ट्रंप इस बात से हताश हैं कि वे इस पूरे घटनाक्रम पर अपना नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने मीडिया पर भी जमकर खुन्नस निकाली है।