देवल संवाददाता, बलिया कलक्ट्रेट में शुक्रवार को भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी प्रतिनिधि को सौंपा।
मोर्चा के सदस्यों ने जाति आधारित जनगणना, ओबीसी के साथ कथित धोखाधड़ी, एससी, एसटी, ओबीसी के समर्थन में सख्त यूजीसी बिल लागू करने और 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त करने की मांग की।
उनकी प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार द्वारा कैबिनेट में ओबीसी की जाति आधारित जनगणना का फैसला करने के बावजूद जनगणना नोटिफिकेशन में ओबीसी के लिए जाति कॉलम शामिल न करना शामिल था। उन्होंने इसे ओबीसी के साथ धोखाधड़ी बताते हुए राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी और जाति कॉलम जोड़ने की मांग की।
मोर्चा ने आरोप लगाया कि कमजोर यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बनाना और फिर सुप्रीम कोर्ट में कमजोर पैरवी कर उस पर रोक लगवाना एससी-एसटी-ओबीसी के साथ धोखा है। उन्होंने एससी-एसटी-ओबीसी के समर्थन में सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बनाकर लागू करने की मांग की।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त करने की भी मांग की। मोर्चा के सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से इस राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन को और अधिक उग्र एवं व्यापक करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।