आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। शिया जामा मस्जिद नवाब बाग़ में बाद नमाज़-ए-जुमा पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित मस्जिद खतीजतुल कुबरा में नमाज़ के दौरान शहीद हुए लोगों को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करने के लिए एक एहतेजाजी जलसा आयोजित किया गया। जलसे में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लेकर घटना की कड़ी निंदा की और शहीदों की मग़फिरत के लिए दुआएं कीं।
तिलावत-ए-क़ुरआन से हुई शुरुआत
जलसे की शुरुआत मौलाना शहज़ादे खां ने तिलावत-ए-क़ुरआन मजीद से की। इसके बाद सभा को संबोधित करते हुए हुज्जत-उल-इस्लाम मौलाना महफुज़ुल हसन खां (प्रिंसिपल जामिया इमानिया नासिरया व इमामे जुमा जौनपुर) ने कहा कि पाकिस्तान में शिया मुसलमानों पर हमले और उनकी हत्याएं लंबे समय से हो रही हैं। उन्होंने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे बेहद दुखद और चिंताजनक बताया।
उन्होंने जलसे में मौजूद लोगों से शहीद नमाज़ियों की मग़फिरत के लिए सूरह-ए-फातेहा की तिलावत करने की दरख्वास्त की और अमन व भाईचारे की दुआ की।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर जताई चिंता
जलसे का संचालन (निज़ामत) सैय्यद असलम नक़वी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की जान-माल की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं और ऐसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं।
इस दौरान शेख़ अली मंज़र डेज़ी, मुतवल्ली शिया जामा मस्जिद नवाब बाग़, ने भी जलसे को संबोधित करते हुए घटना की निंदा की और कहा कि निर्दोष लोगों पर हमला मानवता के खिलाफ है।
फातेहा खानी के साथ हुआ समापन
जलसे के अंत में मौजूद लोगों ने सामूहिक रूप से शहीद हुए नमाज़ियों की मग़फिरत के लिए फातेहा खानी की और उनके परिवारों के लिए सब्र की दुआ की। इस मौके पर पूरे माहौल में ग़म और संवेदना का भाव दिखाई दिया तथा लोगों ने शांति और एकता बनाए रखने की अपील भी की।