प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के समक्ष भारतीय बच्ची अरिहा शाह का मुद्दा उठाया, जो चार वर्ष से अधिक समय से बर्लिन स्थित फोस्टर केयर में रह रही है।
जर्मन अधिकारियों ने 23 सितंबर, 2021 को यह कहते हुए अरिहा को अपनी कस्टडी में ले लिया था कि उसके माता-पिता उसे परेशान करते थे। उस वक्त अरिहा सात महीने की थी।
भारत डाल रहा जर्मनी पर दबाव
भारत सरकार जर्मन अधिकारियों पर अरिहा को जल्द से जल्द भारत वापस भेजने का दबाव डाल रही है। भारत सरकार का तर्क है कि बच्ची के लिए अपने भाषाई, धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक माहौल में रहना जरूरी है।
विदेश सचिव ने क्या बताया?
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उक्त जानकारी देते हुए बताया, ''यह एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है और हम लंबे समय से जर्मन सरकार और नई दिल्ली स्थित दूतावास के साथ इस पर चर्चा कर रहे हैं। एक समय यह कानूनी मुद्दा था, अब हमें इसे मानवीय मुद्दे के तौर पर देखना चाहिए। हम परिवार की हर तरह से मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।'' अरिहा के माता-पिता को फिलहाल महीने में दो बार उससे मिलने की अनुमति है।