बसखारी की पड़रिया फौलादपुर ग्राम सभा में सरकारी धन की खुली बंदरबांट
कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।बसखारी विकासखंड की ग्राम सभा पड़रिया फौलादपुर में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां विकास कार्य केवल कागज़ों तक सीमित रह गए हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रही है।
आरोप है कि गांव में बनाए जा रहे आरसीसी सेंटर की हालत निर्माण पूरा होने से पहले ही जर्जर हो गई है। केंद्र के निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है, जिससे सरकारी धन की गुणवत्ता और उपयोगिता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
आरसीसी सेंटर का उद्देश्य गांव के कूड़े को एक स्थान पर एकत्र कर उसका वैज्ञानिक निस्तारण करना तथा कम से कम एक व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध कराना है। सरकार द्वारा इसके लिए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की गई है, लेकिन जब केंद्र ही पहले से क्षतिग्रस्त हो, तो वहां काम कैसे होगा—यह सवाल ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
*पंचायत भवन मरम्मत के नाम पर लाखों का भुगतान*
_ग्रामीणों के अनुसार पंचायत भवन की मरम्मत और रंगाई-पुताई के नाम पर_
23 दिसंबर 2025 को ₹65,887
16 अक्टूबर 2025 को ₹56,560
का भुगतान किया गया।
जबकि मौके की स्थिति यह है कि पंचायत भवन का फर्श टूटा हुआ है, टाइल्स क्षतिग्रस्त हैं, जमीन में गड्ढे पड़े हैं और न तो किसी तरह की मरम्मत दिखाई देती है और न ही नई रंगाई-पुताई।
*दीवार लेखन पर भी उठे सवाल*
_इतना ही नहीं, पंचायत भवन की दीवारों पर ग्राम पंचायत से संबंधित जानकारी लिखने के नाम पर_
*05 सितंबर 2025 को ₹27,000*
*21 जुलाई 2025 को ₹37,350*
निकाले जाने का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि दीवारों पर ऐसा कोई विशेष लेखन नजर नहीं आता, जो इतने बड़े खर्च को जायज़ ठहरा सके। गांव में इसे लेकर व्यंग्यात्मक चर्चाएं भी हो रही हैं।
*पंचायत भवन बंद, जिम्मेदार गायब*
जांच के दौरान पंचायत भवन बंद मिला। न तो पंचायत सहायक मौजूद थे और न ही ग्राम पंचायत सचिव। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
*निष्पक्ष जांच की मांग*
ग्रामीणों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, पंचायत सहायक और भुगतान पास करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक ऐसे मामलों में सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाएगा।