भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) पर बातचीत पूरी हो गई है। इस समझौते के तहत दोनों देश टैरिफ में व्यापक कटौती करेंगे। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार यूरोपीय संघ लगभग 99% भारतीय निर्यात पर टैरिफ कम या खत्म करेगा। यूरोपियन कमीशन के मुताबिक भारत उनके 96.6% निर्यात पर टैरिफ घटाएगा या समाप्त करेगा। कमीशन का अनुमान है कि इस समझौते से यूरोपीय संघ के निर्यातकों के लिए सालाना चार अरब यूरोप तक के शुल्क की बचत होगी। भारत का यह 22वां एफटीए है। हालांकि 1 जनवरी 2026 से लागू EU के कार्बन टैक्स मुद्दे को इस समझौते में अनसुलझा छोड़ दिया गया है।
समझौते पर अमल में एक साल का वक्त लग सकता है। यूरोपियन कमीशन के मुताबिक, ईयू जल्दी ही बातचीत का ड्राफ्ट प्रकाशित करेगा। इस ड्राफ्ट के कानूनी पहलुओं पर विचार किए जाने के साथ यूरोपीय संघ की सभी आधिकारिक भाषाओं में इसका अनुवाद भी होगा। इसके बाद यूरोपियन कमीशन समझौते पर हस्ताक्षर के लिए इसे यूरोपीय परिषद (Council) को भेजेगा। परिषद की मुहर लगने के बाद यूरोपीय संघ और भारत समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। हस्ताक्षर के बाद यूरोपीय संसद (European Parliament) की सहमति और परिषद के अंतिम निर्णय की आवश्यकता होगी।
भारत से यूरोपियन यूनियन को निर्यात
भारत से प्रमुख निर्यात पेट्रोलियम उत्पाद (डीजल और एटीएफ), स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, मशीनरी और कंप्यूटर, ऑर्गेनिक केमिकल, लोहा और इस्पात, जेम्स-ज्वैलरी, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो पार्ट्स हैं। समझौते से गारमेंट, लेदर, फार्मा, स्टील, पेट्रोलियम प्रोडक्ट और इलेक्ट्रिकल मशीनरी जैसे उत्पाद ईयू में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे। भारत से टेलीकॉम, बिजनेस सर्विसेज और ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं का निर्यात भी बढ़ने के आसार हैं।
भारत में यूरोपियन यूनियन से आयात
ईयू से प्रमुख आयात में मशीनरी, कंप्यूटर (टर्बोजेट सहित), इलेक्ट्रॉनिक्स (मोबाइल फोन पार्ट्स और इंटीग्रेटेड सर्किट सहित), विमान, चिकित्सा उपकरण, वैज्ञानिक उपकरण, अपरिष्कृत हीरे, ऑर्गेनिक केमिकल, प्लास्टिक, लोहा और इस्पात, कारें और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं। ईयू को विमान और उसके पुर्जे, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, हीरे और केमिकल के क्षेत्र में फायदा मिलेगा। वहां की बौद्धिक संपदा, बिजनेस सर्विसेज, आईटी और टेलीकॉम जैसे सेवा क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है।