अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं के बीच व्हाइट हाउस में हुई बैठक के बाद ग्रीनलैंड के उप प्रधानमंत्री म्यूट एगेडे ने बुधवार को कहा कि नाटो के और अधिक सैनिक ग्रीनलैंड की ओर भेजे जा रहे हैं।
म्यूट एगेडे ने आगे कहा, "आज से और आने वाले दिनों में ग्रीनलैंड में नाटो सैनिकों की उपस्थिति बढ़ने की उम्मीद है। सैन्य उड़ानों और जहाजों की संख्या में भी वृद्धि होने की संभावना है।"
फ्रांस, जर्मनी और नॉर्डिक देशों ने पहले ही कहा था कि वे डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र में एक यूरोपीय सैन्य अभियान में भाग लेंगे, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की नजर है।
डेनमार्क का यह है रुख
नाटो के सहयोगी डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिकसन ने पिछले हफ्ते यूरोपीय सहयोगियों के साथ एक बयान में कहा था कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा किया तो इसका सीधा अर्थ नाटो सैन्य गठबंधन का अंत होगा। खनिज संपदा से संपन्न यह द्वीप यहां के लोगों का है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड से संबंधित मामलों में निर्णय लेने का अधिकार केवल यहां के लोगों के पास है।
मैक्रों ने कहा, अभूतपूर्व होंगे प्रभाव रायटर के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को कैबिनेट बैठक में कहा कि अगर किसी यूरोपीय देश और उसके सहयोगी देश की संप्रभुता पर असर पड़ता है तो प्रभाव अभूतपूर्व होंगे।
जर्मनी ग्रीनलैंड में टोही दल भेजेगा
बिल्ड अखबार ने बुधवार को बताया कि जर्मनी इस सप्ताह ग्रीनलैंड में अपने पहले सैनिक भेजेगा। स्वीडन और नार्वे ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस मांग के बाद ग्रीनलैंड में टोही दल भेजने की घोषणा की है कि वॉशिंगटन को द्वीप पर नियंत्रण दिया जाए। अखबार ने जर्मन सरकार और संसदीय सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि टोही दल की तैनाती गुरुवार तक हो सकती है।