कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।जनपद अम्बेडकरनगर में शासन-प्रशासन की आंखों में धूल झोंकते हुए तहसील टांडा क्षेत्र के आसोपुर में सुमित्रा पेट्रोल पंप पिछले पाँच वर्षों से कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेखौफ संचालित हो रहा है। मीडिया की तहकीकात में हुए चौंकाने वाले खुलासों ने पूरे विभागीय तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
*फर्जी प्रमाण पत्र का बड़ा खुलासा*
जाँच में पता चला कि पेट्रोल पंप संचालक द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र दोनों ही असत्य व फर्जी पाए गए। बलिया जिले के रसड़ा तहसीलदार की लिखित सूचना में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि—निवास प्रमाण पत्र संख्या 633132223445 और 633132223417 का आवेदन तक कार्यालय में मौजूद नहीं है
उपजिलाधिकारी रसड़ा, बलिया की लिखित रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई है कि ये प्रमाण पत्र तहसील कार्यालय से जारी ही नहीं हुए।
*जाति प्रमाण पत्र भी रिकॉर्ड में नहीं*
उपजिलाधिकारी रसड़ा द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया कि— जाति प्रमाण पत्र संख्या 633135005004 और 633135005005 का कोई विवरण दफ़्तर के रजिस्टर में दर्ज नहीं है।
*रजिस्टर के पन्नों पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर भी मौजूद नहीं पाए गए।*
प्रमाण पत्र में अंकित पते के सत्यापन हेतु भेजे गए रजिस्टर्ड पत्र "पता नहीं चलता" टिप्पणी के साथ वापस आ गए। ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत रसड़ा बाहरी की 05.07.2022 की आख्या में भी बताया गया कि परिवार रजिस्टर में संबंधित किसी भी व्यक्ति का नाम मौजूद नहीं है। वहीं उपनिबंधक रसड़ा के कार्यालय में 12 वर्षों के बैनामा रजिस्टर की जाँच में भी उपरोक्त नामों के नाम से कोई भूमि क्रय-विक्रय नहीं मिला। इससे साफ है कि उनके नाम न मकान दर्ज है और न ही कोई भूमि।
*फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर पाँच वर्षों से पेट्रोल पंप संचालन*
इन प्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि आसोपुर स्थित सुमित्रा पेट्रोल पंप पिछले पाँच वर्षों से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर चल रहा है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी अनियमितता के बावजूद प्रशासनिक तंत्र ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की—क्या यह मिलीभगत का संकेत है?
*एसडीएम टांडा ने कहा—जल्द होगी कार्रवाई*
फोन वार्ता में उपजिलाधिकारी टांडा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
