देवल संवाददाता, आजमगढ़। लायंस क्लब द्वारा गुरुवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन दास कांप्लेक्स सिविल लाइंस में करके शिक्षाविद कपिलदेव राय को सम्मानित किया गया। इस दौरान लोगों ने उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।बता दें कि कपीलदेव राय का जन्म 3 अक्टूबर 1931 को निजामाबाद के गजयपुर गांव में हुआ था। उन्होंने प्राथमिक और जूनियर शिक्षा: कक्षा 1 से7 तक बीवीपुर कदीम निजामाबाद से प्राप्त किया। हाई स्कूल दयानंद इंटर कॉलेज आजमगढ़,इंटर शिब्ली नेशनल इंटर कॉलेज आजमगढ़, बीएससीऔर बीएड काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी किया। इसके बाद एमए हिंदी गोरखपुर विश्वविद्यालय से किए। इन्होंने गोरखपुर एमए संस्कृत काशी विद्यापीठ वाराणसी से किया। इसके बाद भँवरनाथ गांधी गुरुकुल आजमगढ़, एसकेपी इंटर कॉलेज आजमगढ़ में अध्यापन का काम किया। इसके बाद वेस्ली इंटर कॉलेज में1958 से 1980 सहायक विज्ञान अध्यापक, 1980 से 1992 तक प्रवक्ता हिंदी के रूप में सेवा दी।30 जून 1992 को सेवानिवृत हुए।सामाजिक कार्यों में उनकी खासी रुचि थी।वे वरिष्ठ नागरिक सेवा संस्थान आजमगढ़ के मुख्य संरक्षक,12 वर्ष आर्य समाज आजमगढ़ के प्रधान, आर्य विद्या सभा , दयानंद शिक्षण संस्थाएँपूर्व सदस्य,प्रबंध समिति दयानंद इंटर कॉलेज संयुक्त मंत्री, अखिल भारतीय हिंदी साहित्य परिषद में काम किए वे काव्य रचना, लेखन, वैज्ञानिक जादू, पेंटिंग, कला, वाद्य- सितार , वंशी,माउथ आर्गन, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं, वैदिक प्रवचन, एक्यूप्रेशर औरचुम्बकीय पद्धति से रोगोपचार,दर्शन, अन्तरिक्ष विज्ञान आदि में रुचि रखते हैं।वेद, ब्राह्मण ग्रंथ,शास्त्र, उपनिषद, महाभारत रामायण, पुराण, कुरान, बाइबिल, हिंदी साहित्य का उन्हे अच्छा ज्ञान है। वे महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती को अपना आदर्श मानते हैं।वे हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, अरबी, तमिल, बांग्ला मराठी, रशियन सहित कई भाषाओं के जानकार हैं। उनके निजी पुस्तकालय में लगभग 20 विधाओं की 4000 पुस्तकें हैं।उनका कहना है कि वास्तिवकता और सत्यता जानने के लिए ही मैंने पुराणों, महाभारत,रामायण, रामचरितमानस आदि का अध्ययन किया। श्रद्धा, निष्ठा और आस्था तीनों काअर्थ एक ही है। अर्थात् सत्य पर आधारित, तार्किक और बौद्धिक। अध्यक्षता क्लब के अध्यक्ष लायन अशोक श्रीवास्तव ने की। लायन सुनील अग्रवाल , डा. सीके त्यागी, सुदर्शन दास अग्रवाल, लायन गोकुल दास अग्रवाल, लायन राकेश अग्रवाल, संजय डालमिया, दीपक अग्रवाल, डा. अनुतोष वत्सल आदि ने विचार व्यक्त किया। संयोजक डा. भक्तवत्सल सहाय ने सभी का आभार व्यक्त किया। कहा कि कपीलदेव राय जी ने एक शिक्षक के रूप में हजारों लोगों का जीवन संवारने का काम किया। शिक्षा के साथ ही वे लगातार सामाजिक सरोकार से जुड़े रहे है। वे हम सभी के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं