आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। जौनपुर किला–सद्भावना पुल रोड स्थित पुरातत्व विभाग के संरक्षित क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण के मामले में प्रशासन ने त्वरित और सराहनीय कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया। समाचार प्रकाशित होने और स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आया और संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रभावी हस्तक्षेप किया।
जानकारी के अनुसार संबंधित स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन संरक्षित क्षेत्र में आता है। प्रचलित नियमों के तहत किसी भी संरक्षित स्मारक के 100 मीटर की परिधि को ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ तथा 200 मीटर तक के क्षेत्र को ‘विनियमित क्षेत्र’ घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यह प्रावधान एएमएएसआर अधिनियम, 1958 एवं उसके संशोधनों में स्पष्ट रूप से वर्णित है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट इन्द्र नन्दन सिंह ने त्वरित संज्ञान लिया और जेई मास्टर प्लान प्रशांत कुमार के साथ स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य को नियमों के विपरीत पाए जाने की आशंका पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए, जिसके अनुपालन में मौके पर चल रहा निर्माण कार्य बंद करा दिया गया।
जेई मास्टर प्लान प्रशांत कुमार ने बताया कि संबंधित निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की विधिक जांच की जा रही है। यदि जांच में निर्माण कार्य नियमों के विरुद्ध पाया गया तो संबंधित पक्ष के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संरक्षित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की गतिविधि नियमानुसार ही की जा सकती है और नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की इस सक्रियता की सराहना की है। लोगों का कहना है कि जौनपुर की ऐतिहासिक धरोहरें शहर की पहचान हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रशासन द्वारा समय रहते की गई कार्रवाई से संभावित क्षति को टाल दिया गया है, जिससे नागरिकों में संतोष और विश्वास का वातावरण बना है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मामले की गहन जांच जारी है और आवश्यकतानुसार आगे की विधिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। फिलहाल संरक्षित क्षेत्र में अवैध निर्माण को रुकवाकर प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि विरासत संरक्षण और कानून व्यवस्था के मामले में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।